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लोकतंत्र सेनानियों ने मनाया काला दिवस, मांगा स्वतंत्रता सेनानी का दर्जा

आपातकाल को काला दिवस के रूप में याद किया गया

आपातकाल को काला दिवस के रूप में याद किया गया
लोकतंत्र सेनानियों ने मनाया काला दिवस, मांगा स्वतंत्रता सेनानी का दर्जा

लोकतंत्र सेनानियों ने मनाया काला दिवस, मांगा स्वतंत्रता सेनानी का दर्जा
फिरोजपुर, 25 जून, 2025: लोकतंत्र सेनानी संघ, अबोहर (पंजाब) ने 1975 में तत्कालीन कांग्रेस सरकार द्वारा लगाए गए आपातकाल की 50वीं वर्षगांठ के अवसर पर 25 जून को काला दिवस के रूप में मनाया। यह कार्यक्रम नई आबादी स्थित जय प्रकाश नारायण पार्क में आयोजित किया गया, जहां संघ के सदस्य बड़ी संख्या में एकत्र हुए और राज्य व केंद्र सरकार दोनों के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराने के लिए काले बैज पहने।
कार्यक्रम की अध्यक्षता चौधरी प्रकाश चंद मलेठिया ने की, जिसमें वरिष्ठ लोकतंत्र सेनानी राम किशन मित्तल मुख्य वक्ता थे। अपने संबोधन के दौरान मित्तल ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार पंजाब के आपातकाल के दौरान बंदियों के साथ भेदभाव कर रही है, जबकि अन्य राज्यों के लोकतंत्र सेनानियों को पूर्ण मान्यता और लाभ मिल रहा है। 25 जून 1975 के काले दिनों को याद करते हुए मित्तल ने इस बात पर जोर दिया कि आपातकाल ने न केवल अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता जैसे मौलिक अधिकारों को निलंबित किया, बल्कि भारत के संवैधानिक ताने-बाने को भी गंभीर रूप से घायल किया। उन्होंने सरकार से लोकतंत्र की रक्षा के लिए कठोर कारावास का सामना करने वाले युवाओं को याद करने का आग्रह किया और उनके परिवारों के साथ उचित व्यवहार करने का आह्वान किया।
कार्यक्रम के आयोजक राजेश गुप्ता ने पंजाब के लोकतंत्र सेनानियों को हल्के में लेने के लिए केंद्र सरकार की आलोचना करते हुए कहा, “भाजपा जानती है कि ये लोग राष्ट्र सेवा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता के कारण उन्हें नहीं छोड़ेंगे, लेकिन सरकार इस निष्ठा का दुरुपयोग कर रही है।” उन्होंने चुनाव से पहले दिखावटी सम्मान के लिए माला और शॉल के प्रतीकवाद पर सवाल उठाया और स्वतंत्रता सेनानी अधिनियम के तहत औपचारिक मान्यता की मांग की।
गुप्ता ने जोर देकर कहा कि आपातकाल दूसरे स्वतंत्रता संग्राम के समान था और यह केंद्र सरकार का कर्तव्य है कि वह लोकतंत्र की बहाली के लिए लड़ने वालों को आधिकारिक स्वतंत्रता सेनानी घोषित करे और उन्हें सभी उचित सुविधाएं प्रदान करे।
संघ सचिव अशोक वत्स ने मांग की कि लोकतंत्र सेनानियों को स्वतंत्रता सेनानियों के बराबर मान्यता दी जाए और उन्हें गोल्डन आयुष्मान कार्ड और मुफ्त रेल यात्रा जैसे लाभ दिए जाएं। उन्होंने उनके संघर्ष को सम्मान देने के लिए एक स्मारक के निर्माण का भी आह्वान किया और सिफारिश की कि भविष्य की पीढ़ियों को प्रेरित करने के लिए आपातकालीन युग के प्रतिरोध को शैक्षिक पाठ्यक्रमों में शामिल किया जाना चाहिए। वाट्स ने विशेष रूप से राजू भैया (प्रो. राजेंद्र सिंह) जैसे व्यक्तियों का मरणोपरांत सम्मान करने का उल्लेख किया, जिन्होंने आपातकाल के दौरान भूमिगत रूप से काम किया। संघ ने केंद्र सरकार से लोकतंत्र सेनानी संघ को आधिकारिक रूप से मान्यता देने और उनके सम्मान में ताम्रपत्र जारी करने का भी आह्वान किया। कार्यक्रम का समापन कवि राजेश गुप्ता द्वारा बाबा नागार्जुन की एक क्रांतिकारी कविता, “मोर ना होंगे, उल्लू होंगे” का पाठ करने के साथ हुआ। प्रमुख उपस्थित लोगों में वेद मुटनेजा, नरेश फुटेला, सुभाष बागो, मोहिंदर कुमार, पवन कुमार, भीष्म ठक्कर, राजेश कटारिया, नवीन जैन और सुमित नागपाल शामिल थे। सदस्यों अजय सेतिया, प्रो. चावला और राहुल नड्डा द्वारा एकजुटता के संदेश भेजे गए।

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