
गांधी जयंती के अवसर पर विवेकानंद वर्ल्ड स्कूल में गूंजा गांधीवादी मूल्यों का संदेश
नन्हे विद्यार्थियों द्वारा गांधीजी की भूमिका निभाने से लेकर कक्षा 11वीं-12वीं के विचार-विमर्श तक, विभिन्न गतिविधियों में दिखी रचनात्मकता

गांधी जयंती के अवसर पर विवेकानंद वर्ल्ड स्कूल में गूंजा गांधीवादी मूल्यों का संदेश
नन्हे विद्यार्थियों द्वारा गांधीजी की भूमिका निभाने से लेकर कक्षा 11वीं-12वीं के विचार-विमर्श तक, विभिन्न गतिविधियों में दिखी रचनात्मकता
फिरोजपुर: 2-10-2026: महात्मा गांधी की जयंती के अवसर पर विवेकानंद वर्ल्ड स्कूल, फिरोजपुर में विद्यार्थियों ने रचनात्मक गतिविधियों के माध्यम से गांधीजी के विचारों और जीवन-मूल्यों को जीवंत किया। स्कूल परिसर में आयोजित विभिन्न गतिविधियों ने विद्यार्थियों को सत्य, अहिंसा, स्वच्छता, आत्मनिर्भरता और सेवा जैसे मूल्यों से जोड़ने का एक सार्थक प्रयास किया।
कार्यक्रम की शुरुआत प्लेग्रुप के नन्हे-मुन्ने विद्यार्थियों द्वारा गांधीजी की भूमिका निभाने से हुई। नन्हे कलाकारों ने गांधीजी की शिक्षाओं को सरल और प्रभावशाली अभिनय के माध्यम से प्रस्तुत कर सभी का मन मोह लिया।
कक्षा 1 से 4 के विद्यार्थियों ने गांधीजी के विचारों पर आधारित पोस्टर-निर्माण, चरखा-निर्माण, गांधीजी के तीन बंदरों के संदेश ‘बुरा मत देखो, बुरा मत सुनो, बुरा मत बोलो’ तथा स्वच्छता जागरूकता अभियान में उत्साहपूर्वक भाग लिया। रंगों, रचनात्मकता और गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों ने गांधीजी के स्वदेशी, आत्मनिर्भरता और स्वच्छता के संदेश को अभिव्यक्त किया।
वहीं, कक्षा 11वीं और 12वीं के विद्यार्थियों के लिए ‘क्या गांधीजी के विचार आज भी प्रासंगिक हैं?’ विषय पर विचारोत्तेजक वाद-विवाद आयोजित किया गया। विद्यार्थियों ने अपने तर्कों और विचारों के माध्यम से गांधीवादी सिद्धांतों की वर्तमान समय में उपयोगिता पर चर्चा की। इस गतिविधि ने विद्यार्थियों में तार्किक सोच और प्रभावशाली अभिव्यक्ति को प्रोत्साहित किया।
इसके साथ ही ‘एक नेक कार्य पहल’ के माध्यम से विद्यार्थियों को अपने आसपास किसी व्यक्ति की सहायता करने अथवा कोई सकारात्मक कार्य करने के लिए प्रेरित किया गया। इस पहल ने सेवा, संवेदनशीलता और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना को व्यवहार से जोड़ने का संदेश दिया।
स्कूल निदेशक डॉ. एस. एन. रुद्रा ने कहा, “महात्मा गांधी के विचार केवल इतिहास का विषय नहीं हैं, बल्कि जीवन को बेहतर बनाने वाले मूल्य हैं। जब विद्यार्थी इन मूल्यों को गतिविधियों और अपने व्यवहार के माध्यम से समझते हैं, तभी उनका वास्तविक प्रभाव दिखाई देता है।”
गांधी जयंती का यह आयोजन विद्यार्थियों के लिए सीख, रचनात्मकता और आत्मचिंतन का एक सुंदर संगम रहा, जिसने गांधीजी के विचारों को कक्षा से बाहर निकालकर व्यावहारिक जीवन से जोड़ने का संदेश दिया।




