80 वर्षों की गौरवगाथा: सीमावर्ती फिरोजपुर से विश्व मंच तक डीसीएम ग्रुप ऑफ स्कूल्स का स्वर्णिम सफर
एक सपना, आठ दशक और लाखों सफल भविष्य... यही है डीसीएम की कहानी-

80 वर्षों की गौरवगाथा: सीमावर्ती फिरोजपुर से विश्व मंच तक डीसीएम ग्रुप ऑफ स्कूल्स का स्वर्णिम सफर
-एक सपना, आठ दशक और लाखों सफल भविष्य… यही है डीसीएम की कहानी-
-विभाजन की त्रासदी से विश्वस्तरीय शिक्षा तक: डीसीएम ने लिखी सफलता की नई इबारत-
-जहां शिक्षा बनती है संस्कार, नवाचार और सफलता का आधार—डीसीएम के 80 स्वर्णिम वर्ष-
-80 साल का विश्वास, उत्कृष्ट शिक्षा का इतिहास और भविष्य की नई उड़ान-
फिरोजपुर, 4 जुलाई, 2026
देश जिस वक्त विभाजन का दंश झेल रहा था उस वक्त महान शिक्षाविद्व श्री एम.आर. दास के मन में आजादी भारत के साथ-साथ शिक्षित भातर का भी विचार पैदा हुआ और उन्होंने लोगों के दिल में शिक्षा का प्रसार करने की भावना से वर्ष 1946 में ऐसा पौधा लगाया जोकि आज वटवृक्ष का रूप धारण कर चुका है। उस कठिन समय में उन्होंने सीमावर्ती जिले में डी.सी. मॉडल सीनियर सैकेंडरी स्कूल की स्थापना की और स्थानीय लोगों को उच्च स्तरीय शिक्षा मुहैया करवाई। उन्हीं की बदौलत ही आज यह स्कूल विश्व भर में शिक्षा के क्षेत्र में प्रसिद्धि हासिल कर चुका है। वर्तमान में डीसीएम ग्रुप ऑफ स्कूल्स की उत्तर क्षेत्र में पंजाब, हरियाणा, हिमाचल में 10 स्कूलोंं में हजारों विद्यार्थी शिक्षा हासिल कर रहे है।
वल्र्ड क्लॉस सुविधाएं
विद्यार्थियों को देश-विदेश से उत्तम और टैक्नोलाजी को इंपोर्ट करके शिक्षा के क्षेत्र को बहुत ऊंचा उठाया गया है। ई-कंटैंट के माध्यम से प्रोजैक्टर व इंटरनैट से शिक्षा प्रदान करने के अलावा स्कूल में आर्टीफिशियल इंटैलीजेंस, कोडिंग, 3डी लैब, फोनिक्स, स्टैम, अटल टिंकरिंग लैब, मैथ्स लैब, साइंस लैब,वोसेट, वायहब में विद्यार्थियों को उच्च कोटि की ट्रेनिंग दी जा रही है। नीति आयोग के सहयोग से स्थापित अटल टिंकरिंग लैब में विद्यार्थी आएं दिन अविष्कार कर रहे है, जिसमें विद्यार्थी राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिनिधित्व कर चुके है और उनके द्वारा बनाएं डॉयनैमिक स्ट्रीट लाइट सिस्टम की पूरे देश में सराहना हो चुकी है। इतना ही नहीं माइक्रोसॉफ्ट द्वारा डीसीएम के सभी स्कूलों को माइक्रोसॉफट शोकेस स्कूल घोषित किया गया है और यहां के अध्यापकों को ट्रेनिंग भी दी गई है। डीसीएम के स्कूलों में ना सिर्फ सीबीएसई पाठयक्रम बल्कि कैम्ब्रिज पाठयक्रम, फिनिश पाठयक्रम सहित अन्य बोर्ड का सिलैब्स भी विद्यार्थियों को करवाया जाता है।
विद्यार्थियों को एक छत के नीचे उनकी रूचि के मुताबिक सभी सुविधाएं प्रदान करने के मनोरथ से उन्हें कैरियर काउंसलिंग व गाइडैंस, डांस, म्यूजिक, 200 से ज्यादा कम्पयूटर्स वाली लेब, आधुनिक उपकरणो से लैस साइंस लैब स्थापित की है। हरेक क्लॉस रूम में कम्पयूटर व प्रोजैक्टर की व्यवस्था है।
एंटरप्रिन्योरशिप को बढ़ावा व स्किल डिवैल्पमेंट
एंटरप्रिन्योरशिप को बढ़ावा देने के उद्देश्य से डीसीएम द्वारा विद्यार्थियों को उनकी रूचि के मुताबिक शिक्षा देने का प्रण लिया गया है। डीसीएम की तरफ से भारत का पहला यंग एंटरप्रिन्योर स्कूल -डीसीएम यस- स्कूल लुधियाना में स्थापित किया गया है तो वहीं ट्राईसिटी का पहला डीबैल्स एक्सपीरिंशियल लर्निंग स्कूल स्थापित किया है। यहां पर विद्यार्थियों को उद्योगिक क्षेत्र की जरूरत मुताबिक शिक्षा मुहैया करवाई जाती है और इन स्कूलों में मूट कोर्ट भी स्थापित की गई है। डीसीएम द्वारा देश-विदेश की बड़ी यूनिवर्सिटीयों के साथ एमओयू के तहत वहां के पाठयक्रम को भी विद्यार्थियों को पढ़ाया जाता है ताकि उनके ज्ञान में बढ़ौतरी हो सके। डीसीएम द्वारा क्लॉस रूम में ही विद्यार्थियो में इंटरप्रिन्योरशिप के भाव जगाने के लिए अनेको कदम उठाए जा रहे है। सीबीएसई द्वारा भी कौशल बौद्ध के माध्यम से विद्यार्थियो को स्टार्टअप की दुनिया में आगे लाने का प्रयास किया जा रहा है। डीसीएम ग्रुप ने शुरूआती दौर से ही विद्यार्थियो को स्किल एजुकेशन देने का कार्य किया है ताकि वह हुनरमंद होकर देश के विकास में योगदान दे सके।
प्रतियोगात्मक परीक्षाओं की तैयारी
विद्यार्थियों को प्रतियोगात्मक परीक्षाओं की तैयारी करवाने के उद्देश्य से डीसीएम द्वारा स्कूल में ही शिक्षा मुहैया करवाई जाती है। स्कूल में विद्यार्थियों को नीट, जेईई मेन्स, जेईई एडवांस की कोचिंग देने के अलावा विद्यार्थी विज्ञान मंथन, ओलम्पियाड, एनडीए, टयूट, क्लैट सहित अन्य कोचिंग भी दी जाती है। यहां के हजारों विद्यार्थी बड़े के विश्वस्तरीय आईआईटी में हिस्सा लेकर सफल नागरिक बनते है। वहीं आईएएस और आईपीएस के क्षेत्र में भविष्य बनाने वाले विद्यार्थियों के लिए साईसैक कल्ब का गठन किया गया है, जिसमें विद्यार्थियों को उसी मुताबिक पढ़ाई करवाने के अलावा समय-समय पर सफल आईएएस के साथ बच्चों को मिलवाया जाता है। स्कूलों में करियर काऊसलिंग के लिए कैप प्रोग्राम चलाया जाता है और क्लीनिकल काऊसलिंग के लिए भी प्रोग्राम चलाएं जाते है।
सामाजिक सरोकार की तरफ विशेष ध्यान
शुरूआती दौर से ही डीसीएम ने एक स्कूल ना होकर सामाजिक संस्था के रूप में कार्य किया है। आजाद भारत के बाद 1965 व 1971 के युद्ध से लेकर 1988 की बाढ़, कारगिल के युद्ध, कोविड़-19, आप्रेशन सिंदूर में डीसीएम ने कंधे से कंधा मिलाकर सभी की मदद को हाथ आगे बढ़ाए है। कोविड में स्कूल प्रशासन द्वारा कोविड शील्ड बनाकर वितरित करने के अलावा जरूरतमंदो तक राशन पहुंचाने, वार रूम स्थापित, एम्बलैंस की सेवाए देने में अहम भूमिका निभाई थी। डीसीएम द्वारा सेना और बीएसएफ का भी समय-समय पर सहयोग किया जाता है। समूह की तरफ से बीएसएफ को साईकिले प्रदान करना, हुसैनीवाला पर शैड डलवाने का कार्य, सेना के साथ मिलकर मैराथन करवाने के अलावा सैन्य जवानों की भलाई हेतू अनेकों प्रकल्प चलाए जा रहे है। जेल में बंदियों को शिक्षित और हुनर प्रदान करने के उद्देश्य से कंपयूटर सैंटर भी खोला गया, जहां पर बंदियों को कम्पयूटर शिक्षा दी गई ताकि वह जेल से हुनरमंद होकर बाहर आए और अपने जीवन को सफल बना सके।
बाढ़ के समय में बीएसएफ की चौंकियो में जाकर राहत सामग्री देने के अलावा जिला प्रशासन को भी खाद्य सामग्री, मच्छरदानी सहित अन्य सामान दिया था। इतना ही नहीं राहत केन्द्र में रह रहे बच्चों को खिलौने और कपड़े भी प्रदान किए थे। बच्चों में सामाजिक सारोकार के प्रति बढ़ावा देने के उद्देश्य से कम्यूनिटी आऊटरीच प्रोजेक्ट प्रयास के तहत अन्न दान, वस्त्र दान व स्वच्छता ही सेवा जैसे प्रकल्प चलाएं जा रहे है। खुशियों का कारवां प्रोजैक्ट के तहत विद्यार्थी सिविल अस्पताल में जाकर जहां भोजन वितरित करते है तो वहीं जरूरतमंदों को समय-समय पर वस्त्र दान भी किए जाते है। इसी प्रयास के तहत स्कूल प्रशासन द्वारा सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों को पुस्तके, फर्नीचर भी भेंट किया जाता है।
इवेंट्स के माध्यम से निखरती है प्रतिभा, नेतृत्व और वैश्विक सोच
विद्यार्थियों को शिक्षा सहित हरेक क्षेत्र में परिपक्व करने के मकसद से विजटैक, ऐतस्व, फैंटेसिया, किडजेनिया, यूफोरिया, एगजबयूरेंस, वेब्स, किड्सि पंडोरा, यशस्वी, वंडरफुल आऊटस्टैंडिंग वूमेन, टाइस्कोन, सुपर किडस, कोंफ्यूलेंस, पनाश, फिरोजपुर गलोबल कॅरियर फेयर, फिरोजपुर हैरिटेज मिल्ट्री एंड लिट्रेरी फैस्टिवल जैसे इवेंटस करवाएं जाते है। इतना ही नहीं विद्यार्थियों को अंर्तराष्ट्रीय राजनीति और सम्बंधो से परिचित करवाने के उद्देश्य से बार्डर मॉडल यूनाइटेड नैशन -एमयूएन- भी करवाया जाता है, जिसमें देश के सैंकड़ो स्कूलों के विद्यार्थी हिस्सा लेते है। इसके माध्यम विद्यार्थी को हरेक क्षेत्र में आगे बढऩे के अवसर प्रदान होते है। सीमावर्ती जिलें के उद्यमियों को प्रोत्साहित करने के मनोरथ से डीसीएम द्वारा फिरोजपुर एंटरप्रिन्योर एंड बिजनैस अवार्ड -फैबा-अवार्ड भी करवाया जाता है, जिसमें युवा उद्यमियों को आगे आने के लिए प्रेरित किया जाता है।
पर्यावरण संरक्षण पर मुख्य फोक्स
पर्यावरण के क्षेत्र में अहम भूमिका निभाते हुए डीसीएम द्वारा हर साल हजारों की संख्या में पौधा रोपण किया जाता है। डीसीएम द्वारा राज्य सरकार की योजनाओं के तहत शहर को हरा-भरा करने के उद्देश्य से मिन्नी जंगल बनाने, ग्रीन पैच स्थापित करने में अहम भूमिका निभाई जाती है। किसी भी कार्यक्रम को शुरू करने से पहले स्टाफ सदस्यों के माध्यम से विभिन्न स्थानों पर पौधा रोपण करवाया है। वहीं विद्यार्थियों को प्लास्टिक मुक्त जिला बनाने के लिए सब्जी मंडी और बाजारों में जाकर कपड़े और जूट के थैले भी वितरित किए जाते है। विद्यार्थियों द्वारा रैली और नुक्कड़ नाटक सहित वैस्ट मैटीरियल से उपयोगी सामान बनाकर पर्यावरण के क्षेत्र में अहम भूमिका निभाई जाती है।
1500 से ज्यादा जरूरतमंद विद्यार्थियों की सहायता
शिक्षा में रूचि रखने वाले जरूरतमंद विद्यार्थियों की सहायता के लिए डीसीएम द्वारा हर साल करोड़ों रूपएं की छात्रवृति के अलावा कंसैशन दिए जाते है। स्कूल में ऐसे विद्यार्थियों को बिना किसी भेदभाव के उच्च स्तरीय शिक्षा दी जाती है ताकि वह सफल नागरिक बनकर देश की उन्नति में अपना योगदान दे सके। प्रोजैक्ट रफ्फ़ाक के तहत सैना, बीएसएफ, पुलिस, होमगार्ड सहित अन्य रक्षा क्षेत्र के जवानों, अधिकारियों के बच्चों को स्कूल में एडमिशन और फीस में विशेष छूट दी जाती है।
महिला सशक्तिकरण
डीसीएम द्वारा महिलाओं को सशक्त बनाने के मनोरथ से समय-समय पर ऐसे कार्यक्रम किए जाते है, जिसमें महिलाओं को समाज में आगे आने अवसर मिला है। समूह द्वारा वंडरफुल आऊटस्टैंडिंग वूमेन के तहत उन महिलाओं को सम्मान दिया जाता है, जो समाज में विशिष्ट पहचान रखती है। महिलाओं को उद्यमिता के मार्ग में आगे आने के लिए प्रोत्साहन देने के अलावा वीर नारियों का भी हर वर्ष सम्मान किया जाता है। डीसीएम में ज्यादातर टीचिंग और नॉन टीचिंग स्टाफ नारी है और यहां के सन-शाइन सहायक स्टाफ को ऐसे कोर्स करवाए जाते है, जोकि उन्हें अतिरिक्त आय प्रदान करने में सहायता करते है।
रोजगार के साधन देना
डीसीएम द्वारा प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से 5 हजार से ज्यादा लोगों को रोजगार के साधन मुहैया करवाए जा रहे है, जिसके माध्यम से लोग अपना परिवार और दिनचर्या चला रहे है। उद्योगिक रूप से पिछड़े सीमावर्ती जिलें को शिक्षा और आर्थिक रूप से स्मृद्ध बनाने में डीसीएम का विशेष योगदान रहा है। रोजगार के लिए लोग जहां बड़े शहरों और विदेशों का रूख करते है, वहीं डीसीएम में बाहरीं शहरों से आकर लोग अपनी सेवाएं देते है। डीसीएम में ना सिर्फ भारत बल्कि अन्य देशों के लोग भी सेवाएं देने आते है।
ऐतिहासिक धरोहरों का संरक्षण
जिले में ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण डीसीएम द्वारा समय-समय पर सफाई अभियान चलाया जाता है और उनके बारे में नागरिकों को जागरूक भी किया जाता है। डीसीएम द्वारा अपने स्कूलों में धरोहर क्लब भी स्थापित किए गए है, जिसमें विद्यार्थियों द्वारा जिले की विभिन्न धरोहरों के इतिहास पर सर्च करने के बाद उसे वर्कशॉप के माध्यम से जनता को बताया जाता है। फिरोजपुर फोर्ट के खुलने से लेकर उसके प्रति जनता में जागरूकता लाने, सारागढ़ी मैमोरियल और हुसैनीवाला के विकास में अहम योगदान देने में डीसीएम ग्रुप का विशेष योगदान रहा है।
खेलों के क्षेत्र में विश्व के मानचित्र पर चमकाया नाम
खेलों के क्षेत्र में विद्यार्थियों को विश्व स्तरीय सुविधाएं देने में डीसीएम का अहम योगदान रहा है और यहीं कारण है कि यहां के विद्यार्थी विदेशों में जाकर डीसीएम सहित अपने जिलें और अभिभावकों का नाम रोशन कर रहे है। डीसीएम के स्कूलों में 20 से ज्यादा स्पोर्टस सुविधाओं में गोल्फ, क्रिकेट, रोलर स्केटिंग, बैडमिंटन, ताइक्वांडो, लान टेनिस, बास्केटबाल, शूटिंग, स्वीमिंग, आर्चरी, वॉलीबाल, हाकी, टेबल टैनिस, चैस, कैरम, पिकल बाल, एलीमैंट्री स्पोर्टस, एथलैटिक्स, योग, फैंसिंग, करवाई जाती है। हाल ही में स्कूल के तीन विद्यार्थियों ने एशियन चेम्पियनशिप में तीन मैडल जीतकर स्कूल का नाम रोशन किया है और इससे पहले भी राष्ट्रीय स्तर पर खिलाड़ी गोल्ड मैडल तक जीत चुके है। स्कूल में सुबह-शाम विद्यार्थियों की खेल कक्षाएं लगाई जाती है, जिसमें वह अपनी रूचि के मुताबिक स्पोर्टस गतिविधियों में हिस्सा लेते है। डीसीएम द्वारा राष्ट्रीय स्तर पर योगा चैम्पियनशिप करवाकर देश भर के योगार्थियों को एकत्रित किया था ताकि योग का प्रचार-प्रसार किया जा सके।
शहरी सौंदर्यीकरण पर जोर
प्रोजैक्ट स्मार्ट सिटी के तहत डीसीएम द्वारा पंजाब, हरियाणा, हिमाचल में ग्रीन पैच, पार्क, विभिन्न चौंक के निर्माण व नवीनीकरण सम्बंधी कार्य किए जाते है ताकि शहरों को सुंदर रूप प्रदान किया जा सके। इस प्रोजैक्ट के तहत सडक़ों के दोनो तरफ पौधा रोपण किया जाता है, ताकि पर्यावरण की रक्षा के अलावा हरियाली को बढ़ावा मिले।
उपलब्धियों के मिल चुके सैंकड़ो अवार्ड
डीसीएम ग्रुप की अहम उपलब्धियों को देखते हुए देश-विदेश में विभिन्न कार्यक्रमों में डीसीएम ग्रुप को सैंकड़ों की संख्या में अवार्ड मिल चुके है। डीसी मॉडल स्कूल को वर्ष 2015 में पंजाब का बेस्ट स्कूल घोषित किया गया था तो वहीं समाजिक सारोकार हेतू चलाई उपलब्धियों में इसे देश भर में नंबर 2 रैंक प्राप्त है। एजुकेशन वल्र्ड द्वारा इंडिया स्कूल रैकिंग 2025-26 में दास एंड ब्राऊन वल्र्ड स्कूल को जिले का नंबर वन स्कूल के खिताब से नवाजा गया है। इसी कड़ी के तहत दास एंड ब्राऊन स्कूल को को-एड डे स्कूल श्रेणी में जिले का पहला स्कूल घोषित किया गया है, जोकि गर्व का विषय है। राज्य के पांच स्कूलो में से एजुकेशन वल्र्ड इंडिया स्कूल रैंकिंग 2017, अपकमिंग स्कूल ऑफ द ईयर के तहत नैशनल स्कूल अवॉर्ड, एजुकेशन वल्र्ड इंडिया स्कूल रैंकिंग 2018-19, इंडिया स्कूल मैरिट अवॉर्ड 2018, ग्रीन स्कूल प्रोग्राम अवॉर्ड 2018 भी मिल चुके है। सभी स्कूलों को लगातार चार वर्षो को माइक्रोसोफ्ट शोकेज स्कूल का खिताब प्राप्त हो रहा है।
विजनरी लीडर है सीईओ डा. अनिरूद्ध गुप्ता
डीसीएम ग्रुप ऑफ स्कूल्स के सीईओ डा. अनिरूद्ध गुप्ता विजनरी और दूदर्शी सोच मालिक है। हाल ही में डा. अनिरूद्ध गुप्ता को बंगलौर में प्रकाशित होने वाली भारत की विख्यात मैगजीन द अकैडमिक्स हाईटस द्वारा विजनरी लीडर ऑफ द ईयर 2026 के खिताब से नवाजा गया है और डा. अनिरूद्ध गुप्ता का चयन देश के प्रमुख 25 एजुकेशन थॉटस लीडर्स में भी चयनित किया है।
विभिन्न क्षेत्रों मेें नए आयाम स्थापित करने वाले डा. अनिरूद्ध गुप्ता को विभिन्न मंचो से अब तक एक शतक से ज्यादा खिताब हासिल करने का रिकार्ड बना चुके है। डा. अनिरूद्ध गुप्ता को सात बार एडूप्रन्योर ऑफ द ईयर अवार्ड, एडु लीडर ऑफ द ईयर के अलावा टाईम्स पॉवर आईकन अवार्ड 2021 तथा देश की प्रमुख शिक्षा जगत की 21 हस्तियो में शामिल किया जा चुका है। डा. गुप्ता को इससे पहले समूह एशिया में आयोजित सबसे बड़ी एजुकेशनल सम्मिट बैट एशिया द्वारा डीसीएम ग्रुप ऑफ स्कूल्स के सीईओ अनिरूद्ध गुप्ता का बैट एशिया लीडरशिप अवार्ड 2021 के लिए चयन हुआ था। डा. अनिरूद्ध गुप्ता को मुम्बई के राजभवन में महाराष्ट्र के राज्यपाल रमेश बैस द्वारा भव्य समारोह में -द प्राईड ऑफ इंडियन एजुकेशन अवार्ड- से नवाजा जा चुका है
2023 में इंडो-लंका सम्मिट में डा. अनिरूद्ध गुप्ता को कोलम्बो में श्रीलंका के प्रधानमंत्री डा. दिनेश गुणावर्र्धने द्वारा विशेष रूप से अंर्तराष्ट्रीय शिक्षा उत्कृष्टता पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया था। 2022 में मॉरिशस के राष्ट्रपति पृथ्वीराज सिंह रूपन द्वारा भी उनका सम्मान किया जा चुका है। उससे पहले भारत के दिवंगत राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी भी द्वारा गुप्ता की शिक्षा सम्बंधी सेवाओ को देखते हुए सम्मानित कर चुके है। डा. अनिरूद्ध गुप्ता ने दुबई के वल्र्ड ट्रेड सैंटर में हिस्सा लेने के अलावा इजरायल का भी दौरा कर चुके है। डा. अनिरूद्ध गुप्ता द्वारा सीमावर्ती जिले की भलाई के लिए किए जा रहे कार्यो के चलते लोग उन्हें अब फिरोजपुर के लिए वरदान कहने लगे है। उनके द्वारा जिले में प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से करीब 3500 परिवारो को रोजगार के साधन मुहैया करवाए जा रहे है। जिले की आर्थिकता के विकास में भी डा. अनिरूद्ध गुप्ता का अहम योगदान है।
इन्होंने विश्व में चमकाया डीसीएम का नाम
श्री दास द्वारा बहाई शिक्षा की गंगा में डुबकी लगाकर लाखों विद्यार्थी देश-विदेश में उच्च जहां उच्च पदों पर आसीन है तो वहीं उनके बताए मार्ग का अनुसरण भी कर रहे है। डिप्टी चीफ इंटीग्रेटिड डिफैंस स्टॉफ के अनिल अहूजा, लॉफ्टर योगा के जनक डा. मदन कटारिया, यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया के डॉक्टर संदीप संधा, इंडियन आर्मी के सर्जन मेजर डा: रजत प्रभाकर, भारत सरकार के संयुक्त सचिव अमित सिंगला, टैलीविजन एक्ट्रैस एनी गिल्ल, इंडियन एयरफोर्स के अधिकारी विकास मदान, आईएएस डीपीएस खरबंदा, पीसीएम कुसुम व खुशदिल, डिप्टी कमिश्नर हिमांशु अग्रवाल, विधायक सुखपाल भुल्लर, विधायक अमोलक सिंह, राज्य के पूर्व खेल मंत्री राणा गुरमीत सोढ़ी जैसी अनेको ऐसी शख्सियते जिन्होंने न्यायपालिका, कार्यपालिका, पुलिस, आर्मी सहित अन्य क्षेत्र में सेवाएं देकर स्कूल का नाम रोशन कर रहे है। उन्होंने बताया कि ऐसे विद्यार्थियों के लिए स्कूल द्वारा मिडास का भी गठन किया जा चुका है।





