डॉ अतुल फुलझेले, IPS, महानिरीक्षक, BSF पंजाब, ने राजामोहतम दिवस पर ऐतिहासिक बीओपी राजामोहतम में शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की

डॉ अतुल फुलझेले, IPS, महानिरीक्षक, BSF पंजाब, ने राजामोहतम दिवस पर ऐतिहासिक बीओपी राजामोहतम में शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की
फिरोज़पुर, 11 दिसम्बर 2025: डॉ. अतुल फुलझेले, IPS, महानिरीक्षक, सीमा सुरक्षा बल (BSF) पंजाब फ्रंटियर, 11 दिसम्बर 2025 को लगभग 1045 बजे, ने ऐतिहासिक बीओपी राजामोहतम का दौरा किया। इस दौरान महानिरीक्षक ने 1971 के इंडो-पाक युद्ध में राष्ट्र की सीमाओं की रक्षा करते हुए सर्वोच्च बलिदान देने वाले BSF के शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की। यह पोस्ट कंपनी-स्तर की तैनाती वाला एक महत्वपूर्ण स्थान है, जो युद्ध के दौरान अपनी वीरतापूर्ण रक्षा के लिए प्रसिद्ध है।
दौरे के दौरान महानिरीक्षक ने शहीदों के परिजनों को सम्मानित करने हेतु एक विशेष समारोह का आयोजन किया। उन्होंने प्रत्येक परिवार से मिलकर उनके प्रियजनों के साहस, बलिदान और राष्ट्र के प्रति समर्पण के लिए गहरी श्रद्धा, कृतज्ञता एवं सम्मान प्रकट किया और शहीद परिवारों को स्मृति चिन्ह भेंट कर उनके अटूट साहस को नमन किया।। इस अवसर पर उन्होंने 1971 के युद्ध में बीएसएफ की महत्वपूर्ण भूमिका पर आधारित डॉक्यूमेंट्री “राजा मोहतम : द अनटोल्ड सागा ऑफ BSF ब्रेवरी” का भी अवलोकन किया।
इस कार्यक्रम में श्री स्नेहदीप शर्मा, आईपीएस, डीआईजी रेंज पंजाब पुलिस, श्री भूपेन्दर सिंह, पीपीएस, एसएसपी फिरोजपुर, श्री राजबीर सिंह, पीपीएस, डीएसपी लाखो के बेहराम, श्री गुरप्रीत सिंह, मुख्य प्रबंधक, एसबीआई साथ ही अन्य नागरिक गणमान्य, सीमा क्षेत्र के निवासी एवं बीएसएफ शहीदों के परिजन उपस्थित थे।
महानिरीक्षक ने स्थानीय सीमा आबादी को BSF को लगातार सहयोग देने, अपराध रोकने तथा सीमा क्षेत्र में अवैध गतिविधियों का मुकाबला करने में उनके महत्वपूर्ण योगदान के लिए सराहा। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय सीमा पर शांति, सुरक्षा एवं सतर्कता बनाए रखने में समुदाय की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।
बीओपी राजामोहतम का ऐतिहासिक विवरण
03 दिसम्बर 1971 भारत के सैन्य इतिहास का एक महत्वपूर्ण दिवस है। 1971 के इंडो-पाक युद्ध की शुरुआत में पाकिस्तान द्वारा भारतीय क्षेत्र पर किए गए हमले तथा सामरिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए भारतीय सेना ने अस्थायी रूप से बीओपी राजामोहतम को खाली कर दिया था। इसके उपरांत पाकिस्तान सेना की 9 बालोच रेजिमेंट की एक कंपनी, भारी हथियारों से सुसज्जित होकर, इस पोस्ट पर काबिज हो गई।
युद्ध के और भी उग्र होने पर भारतीय सेना ने बीओपी राजामोहतम को पुनः प्राप्त करने की जिम्मेदारी BSF की 31 बटालियन को सौंपी, जिसे “थर्टी वन – द ब्रेवेस्ट वन” के नाम से जाना जाता है। यह महत्वपूर्ण दायित्व 06 दिसम्बर 1971 को सहायक कमांडेंट श्री राम किशन वाधवा को सौंपा गया।
समय, जनशक्ति और संसाधनों की गंभीर कमी के बावजूद श्री आर. के. वाधवा ने अपने दस्ते को तीव्रता और दक्षता के साथ कार्रवाई के लिए तैयार किया। क्षेत्र में बारूदी सुरंगों की भारी मात्रा थी और दुश्मन छोटे हथियारों एवं मशीनगनों से लगातार फायर कर रहा था। इसके बावजूद उन्होंने अदम्य साहस, उत्कृष्ट सैन्य कौशल और कर्तव्यनिष्ठा के साथ अपने जवानों का नेतृत्व किया। उनके नेतृत्व से प्रेरित होकर बीएसएफ जवानों ने व्यक्तिगत सुरक्षा की परवाह किए बिना दुश्मन पर धावा बोला।
07 दिसम्बर 1971 की सुबह से पहले BSF के इस साहसिक अभियान में बीओपी राजामोहतम को सफलतापूर्वक पुनः कब्जे में ले लिया गया और पाकिस्तानी सेना को पीछे हटने पर मजबूर किया गया। इस भीषण संघर्ष में BSF के तीन वीर जवान, सब-इंस्पेक्टर इक़बाल सिंह, कांस्टेबल सुखा सिंह और कांस्टेबल राम सिंह ने राष्ट्र के लिए अपने प्राणों की आहुति दी।
इसके उपरांत पाकिस्तानी सेना ने पोस्ट पर दोबारा कब्जा करने के लिए कई बार पलटवार किए, जिन्हें BSF के जवानों ने असाधारण साहस एवं दृढ़ता के साथ विफल कर दिया और पोस्ट की रक्षा मजबूती से जारी रखी।
11 दिसम्बर 1971 को एक और हमले को विफल करते हुए एक दुश्मन का गोला श्री आर. के. वाधवा के निकट गिरा, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हुए और वीरगति को प्राप्त हुए।
इन अभियानों के दौरान कुल 09 BSF जवान, जिनमें सहायक कमांडेंट श्री आर. के. वाधवा भी शामिल थे, ने सर्वोच्च बलिदान दिया। उनकी अद्वितीय वीरता के लिए BSF के जवानों को एक महावीर चक्र, दो सेना पदक, एक पुलिस पदक (गैलेंट्री) तथा पाँच मेंशन-इन-डिस्पैचेस (MiD) से सम्मानित किया गया।
आज बीओपी राजामोहतम अदम्य साहस, सर्वोच्च बलिदान और अटल देशभक्ति का अमर प्रतीक है, जो BSF और राष्ट्र के गौरवशाली इतिहास में सदैव अंकित रहेगा।





