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इंसान की ज़िंदगी का असली मकसद सिर्फ़ पूर्ण सतगुरु की शरण में जाने से ही पूरा होता है: साध्वी त्रिवेणी भारती जी

इंसान की ज़िंदगी का असली मकसद सिर्फ़ पूर्ण सतगुरु की शरण में जाने से ही पूरा होता है: साध्वी त्रिवेणी भारती जी
इंसान की ज़िंदगी का असली मकसद सिर्फ़ पूर्ण सतगुरु की शरण में जाने से ही पूरा होता है: साध्वी त्रिवेणी भारती जी
फिरोजपुर, 6-7-2026: दिव्य ज्योति जागृति संस्थान फिरोजपुर के स्थानीय आश्रम में साप्ताहिक सत्संग प्रोग्राम बड़ी श्रद्धा, भक्ति और रूहानी जोश के साथ किया गया। इस  प्रोग्राम में बड़ी संख्या में भक्तों ने हिस्सा लिया और गुरु के चरणों में अपनी हाज़िरी लगाई और रूहानी विचारों से अपनी ज़िंदगी रोशन करने की प्रेरणा ली। पूरा आश्रम भजन-कीर्तन, प्रभु सिमरन और गुरु महिमा से गूंज उठा, जिससे माहौल भक्तिमय हो गया। संस्थान के संस्थापक एवं संचालक श्री आशुतोष महाराज जी की परम शिष्या साध्वी त्रिवेणी भारती जी ने संगत को संबोधित करते हुए प्रेरणा देने वाले विचार रखे। उन्होंने कहा कि इंसान की ज़िंदगी भगवान की अनमोल देन है और इसका असली मकसद भगवान को पाना है। लेकिन चंचल मन इंसान को काम, क्रोध, लोभ, मोह और अहंकार जैसे बुराइयों में उलझाकर उसके असली मकसद से दूर ले जाता है। इसलिए मन को भगवान से जोड़ने के लिए पूर्ण  गुरु की शरण में जाना बहुत ज़रूरी है। उन्होंने कहा कि भक्ति सिर्फ बाहरी रस्मों या रिवाजों का नाम नहीं है, बल्कि अपने अंदर ईश्वर के असली अनुभव का नाम है। यह अनुभव सिर्फ पूर्ण गुरु की कृपा से ही संभव है, जो ब्रह्म ज्ञान देकर आत्मा को भगवान के असली रूप के दर्शन कराते हैं। जब कोई इंसान अपने अंदर ईश्वर का प्रकाश देखता है, तो उसके जीवन में सच्ची भक्ति, प्रेम, करुणा, विनम्रता और सेवा के गुण अपने आप प्रकट होने लगते हैं। साध्वी त्रिवेणी भारती जी ने आगे कहा कि इतिहास इस बात का गवाह है कि हर युग में जिन महापुरुषों ने पूर्ण सतगुरु की शरण ली, वे न सिर्फ खुद ईश्वर से एक हो गए, बल्कि उन्होंने समाज को भी सच्चाई, प्रेम, भाईचारे और इंसानियत का रास्ता दिखाया। इसलिए आज के समय में भी हर इंसान को पूर्ण सतगुरु की शरण में आकर अपना जीवन सफल बनाना चाहिए। इस मौके पर *साध्वी करमाली भारती जी* ने संगत को संबोधित करते हुए कहा कि ईश्वर की प्राप्ति ही इंसान के जीवन का सबसे ऊंचा और महान लक्ष्य है। यह प्राप्ति न तो धन से संभव है और न ही केवल पुस्तकों से ज्ञान प्राप्त करने से, बल्कि पूर्ण सतगुरु की कृपा से प्राप्त ब्रह्म ज्ञान के माध्यम से ही व्यक्ति ईश्वर का प्रत्यक्ष अनुभव कर सकता है। उन्होंने कहा कि जब व्यक्ति अपने जीवन में गुरु की आज्ञा को अपनाता है, तो उसका जीवन शांति, संतोष, प्रेम और आनंद से भर जाता है। गुरु की शरण व्यक्ति को सभी प्रकार के भय, भटकाव और मानसिक अशांति से मुक्त करके परम आनंद की स्थिति में ले जाती है।
उन्होंने संगत को जीवन में सेवा, ध्यान, सत्संग और नैतिकता अपनाने के लिए प्रेरित किया, क्योंकि ये वे गुण हैं जो व्यक्ति को एक अच्छा इंसान बनाते हैं और समाज में आपसी प्रेम, सद्भाव और एकता को मजबूत करते हैं। आज जब भौतिकवाद की दौड़ में मनुष्य ने आंतरिक शांति खो दी है, ऐसे समय में सत्संग ही एकमात्र माध्यम है जो मनुष्य को उसके सच्चे स्वरूप और ईश्वर से जोड़ता है।
सत्संग के दौरान साध्वी मनजिंदर भारती जी ने भावपूर्ण भजन और कीर्तन के माध्यम से पूरी संगत को प्रभु भक्ति के रंग में रंग दिया। भजनों के माध्यम से गुरु की महिमा, प्रभु प्रेम और मानव जीवन की प्रासंगिकता का संदेश दिया गया, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय और आनंदमय हो गया।

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