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दिव्य ज्योति जागृति संस्थान के स्थानीय आश्रम में साप्ताहिक सत्संग प्रोग्राम

दिव्य ज्योति जागृति संस्थान के स्थानीय आश्रम में साप्ताहिक सत्संग प्रोग्राम
फ़िरोज़पुर , 5-4-2026: दिव्य ज्योति जागृति संस्थान के स्थानीय आश्रम में साप्ताहिक सत्संग प्रोग्राम हुआ। सर्व श्री आशुतोष महाराज जी की परम शिष्या साध्वी सुश्री हरजीत भारती जी ने संगत को संबोधित करते हुए कहा कि इंसान की ज़िंदगी में मन का सबसे अहम स्थान है। मन ही हमारी हर सोच, हर काम और ज़िंदगी की दिशा तय करता है। अगर मन इच्छाओं और माया के मोह में फँस जाए, तो इंसान को दुख, चिंता और बेचैनी की ओर धकेलता है। लेकिन जब यही मन सत्संग और भक्ति के रास्ते पर चलता है, तो यह मन की शांति, खुशी और आनंद का ज़रिया बन जाता है।
सत्संग वह पवित्र मंच है जहाँ इंसान हमारे धार्मिक ग्रंथों और धर्मग्रंथों के अनमोल वचन सुनकर अपने मन को कंट्रोल करना सीखता है। सत्संग मन को ऊँचे विचारों से भरता है, भटकते मन को रोकता है और भक्ति के ज़रिए उसे भगवान से जोड़ता है। यहाँ इंसान को पता चलता है कि सच्चा सुख बाहरी चीज़ों में नहीं, बल्कि उसके मन की शांति और भक्ति में है।
साध्वी करमाली भारती जी ने कहा कि भक्ति मन को पवित्र करने का सबसे आसान और असरदार तरीका है। जब इंसान भगवान के नाम का ध्यान करता है, उनकी दया को याद करता है, और अपने दिल में विनम्रता लाता है, तो वही मन भगवान के चरणों में बस जाता है। भक्ति किसी खास जगह या समय तक सीमित नहीं है। यह एक ऐसा अनुभव है जिसे इंसान के जीवन के हर काम में शामिल किया जा सकता है—चाहे वह घर के काम हों, सेवा हो, या दुनियावी काम हों।
सत्संग में होने से इंसान के जीवन को एक नई दिशा मिलती है। यहां, इंसान समझता है कि जीवन का असली मकसद सिर्फ भौतिक सुखों की तलाश नहीं है, बल्कि मन को अध्यात्म के रास्ते पर लाना है। जैसे ही इंसान का मन गुरु की भक्ति में लग जाता है, वह हर तरह के दुख, डर और भटकाव से मुक्त हो जाता है और सच्चा आनंद पाता है।
इसलिए, मन और भक्ति का मिलन इंसान के जीवन को सुंदर, सार्थक और आध्यात्मिक रूप से मजबूत बनाता है। सत्संग इस मिलन की चाबी है, जो इंसान को अंदर की रोशनी, शांति और भगवान के साथ एक होने का अनुभव कराता है। साध्वी जी ने कहा कि यह साफ़ है कि भक्ति की सच्ची प्राप्ति सिर्फ़ पूर्ण सतगुरु की कृपा से ही संभव है। पूर्ण सतगुरु मन को सही दिशा देकर भक्ति के मार्ग पर आगे बढ़ाते हैं और उसे ईश्वर से मिलाते हैं। वे दिव्य ज्ञान के ज़रिए हमारी तीसरी आँख यानी दसवां दरवाज़ा खोलते हैं और हमारे अंदर ईश्वर से मिलाते हैं। तभी असली भक्ति शुरू होती है और हम आत्मिक शांति पाने की ओर आगे बढ़ते हैं। आखिर में गुरु बहन नैन्सी जी ने भजन कीर्तन गाया।





