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नशामुक्त विद्यार्थी ही राष्ट्रनिर्माण की सशक्त आधारशिला बन सकते हैं:- स्वामी विज्ञानानंद जी।

संस्थान द्वारा ग्राम बारे के में नशा उन्मूलन कार्यक्रम का आयोजन।

नशामुक्त विद्यार्थी ही राष्ट्रनिर्माण की सशक्त आधारशिला बन सकते हैं:- स्वामी विज्ञानानंद जी।
नशामुक्त विद्यार्थी ही राष्ट्रनिर्माण की सशक्त आधारशिला बन सकते हैं:- स्वामी विज्ञानानंद जी।
संस्थान द्वारा ग्राम बारे के में नशा उन्मूलन कार्यक्रम का आयोजन।
फिरोज़पुर (8 अक्तूबर 2026): दिव्य ज्योति जागृति संस्थान द्वारा अपने नशा उन्मूलन कार्यक्रम बोध प्रकल्प के अंतर्गत सरकारी सीनी. सेकेंडरी स्कूल ग्राम बारे के में क्विट करो वर्कशॉप का आयोजन किया गया। जिसमें संस्थान की ओर से दिव्य गुरु श्री आशुतोष महाराज जी के शिष्य स्वामी विज्ञानानंद जी ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए बताया कि विद्यार्थी देश का भविष्य और समाज की सबसे महत्वपूर्ण शक्ति हैं। उनके स्वस्थ, शिक्षित और संस्कारवान होने पर ही राष्ट्र की प्रगति निर्भर करती है। किंतु आज नशे की बढ़ती प्रवृत्ति विद्यार्थियों के भविष्य के लिए गंभीर चिंता का विषय बनती जा रही है। नशे की आदत व्यक्ति के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को नुकसान पहुँचाने के साथ-साथ उसके पारिवारिक, सामाजिक और शैक्षिक जीवन को भी प्रभावित करती है।
नशीले पदार्थों का सेवन विद्यार्थियों की एकाग्रता और स्मरणशक्ति को कमजोर करता है। इससे पढ़ाई में रुचि कम होने लगती है और परीक्षा परिणाम प्रभावित होते हैं। धीरे-धीरे विद्यार्थी तनाव, चिड़चिड़ापन, अवसाद, अनिद्रा तथा आत्मविश्वास की कमी जैसी समस्याओं का सामना कर सकता है। नशा शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता को कमजोर करता है और कई गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है। इसके अतिरिक्त, नशे की लत आर्थिक समस्याएँ उत्पन्न करती है तथा व्यक्ति को गलत संगति और अपराध की ओर भी धकेल सकती है। इसका सबसे दुखद प्रभाव परिवार पर पड़ता है, जहाँ विश्वास, सम्मान और सुख-शांति धीरे-धीरे समाप्त होने लगती है।
नशे से मुक्ति केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि पूरे परिवार और समाज का संघर्ष है। विद्यार्थियों को चाहिए कि वे नशे से दूर रहने का दृढ़ संकल्प लें और अपने मित्रों को भी इसके दुष्परिणामों के प्रति जागरूक करें। यदि कोई विद्यार्थी पहले से नशे की गिरफ्त में है, तो उसे शर्मिंदा या बहिष्कृत करने के बजाय परिवार, शिक्षक और समाज को उसका सहयोग करना चाहिए। आवश्यकता पड़ने पर चिकित्सक, मनोवैज्ञानिक अथवा नशामुक्ति केंद्र की सहायता लेनी चाहिए। नशा छोड़ने के लिए सकारात्मक सोच, दृढ़ इच्छाशक्ति और स्वस्थ दिनचर्या अत्यंत आवश्यक है। खेलकूद, योग, ध्यान, संगीत, अध्ययन तथा रचनात्मक गतिविधियों को जीवन का हिस्सा बनाकर नशे की आदत से बाहर निकलने में सहायता मिल सकती है। बुरी संगति से दूरी बनाना और ऐसे मित्रों का साथ चुनना भी आवश्यक है जो स्वस्थ एवं सकारात्मक जीवन के लिए प्रेरित करें।
इस अवसर पर सभी विद्यार्थियों, अभिभावकों और शिक्षकों से अपील की जाती है कि वे मिलकर नशामुक्त समाज के निर्माण में अपनी भूमिका निभाएँ। प्रत्येक विद्यार्थी यह संकल्प ले—“नशे को न कहेंगे, स्वस्थ जीवन को अपनाएँगे और नशे को अपने जीवन से सदा के लिए दूर रखेंगे।” जागरूकता, सहयोग और दृढ़ संकल्प के माध्यम से ही हम युवा पीढ़ी को नशे की बुराई से बचाकर एक स्वस्थ, सुरक्षित और उज्ज्वल भविष्य की ओर ले जा सकते हैं।
उक्त कार्यशाला के लिए स्कूल प्रशासन ने स्वामी जी का कोटिशः आभार व्यक्त किया।

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