Ferozepur News

आत्म जाग्रति से प्राप्त मनोबल ही सफल जीवन का सशक्त सोपान है:- स्वामी विज्ञानानंद जी।

संस्थान द्वारा शांति विद्या मंदिर में मनोबलम नामक वर्कशॉप का सफल आयोजन।

आत्म जाग्रति से प्राप्त मनोबल ही सफल जीवन का सशक्त सोपान है:- स्वामी विज्ञानानंद जी।
आत्म जाग्रति से प्राप्त मनोबल ही सफल जीवन का सशक्त सोपान है:- स्वामी विज्ञानानंद जी।
संस्थान द्वारा शांति विद्या मंदिर में मनोबलम नामक वर्कशॉप का सफल आयोजन।
फिरोजपुर (7 अक्टूबर 2026)  दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान द्वारा स्थानीय शांति विद्या मंदिर में तनाव प्रबंधन पर मनोबलम कार्यशाला का आयोजन किया गया। जिसमें संस्थान की ओर से से दिव्य गुरु श्री आशुतोष महाराज जी के शिष्य स्वामी विज्ञानानंद जी ने विद्यार्थियों का मार्गदर्शन करते हुए बताया कि वर्तमान समय में तेज़ जीवनशैली, कार्य का बढ़ता दबाव, पारिवारिक एवं सामाजिक जिम्मेदारियाँ तथा बदलती परिस्थितियाँ लोगों में तनाव का कारण बन रही हैं। तनाव एक सामान्य मानसिक एवं शारीरिक प्रतिक्रिया है, लेकिन लंबे समय तक बना रहने वाला तनाव व्यक्ति के स्वास्थ्य, कार्यक्षमता और पारिवारिक जीवन को प्रभावित कर सकता है। ऐसे में तनाव का समय रहते प्रबंधन करना अत्यंत आवश्यक है।
तनाव प्रबंधन का प्रमुख उद्देश्य तनाव के कारणों को पहचानना और उनसे प्रभावी ढंग से निपटने के लिए स्वस्थ आदतों को अपनाना है। विशेषज्ञों के अनुसार नियमित दिनचर्या, पर्याप्त नींद, संतुलित आहार और शारीरिक गतिविधि तनाव कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। प्रतिदिन कुछ समय योग, प्राणायाम, ध्यान या हल्के व्यायाम के लिए निकालना मानसिक शांति बनाए रखने में सहायक हो सकता है। कार्यस्थल पर तनाव कम करने के लिए समय प्रबंधन भी महत्वपूर्ण है। कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर व्यवस्थित करना, अनावश्यक दबाव से बचना तथा बीच-बीच में छोटे विराम लेना व्यक्ति की कार्यक्षमता को बेहतर बना सकता है। विद्यार्थियों के लिए पढ़ाई का समय निर्धारित करना, नियमित विश्राम लेना और परीक्षा संबंधी चिंता को परिवार एवं शिक्षकों के साथ साझा करना उपयोगी हो सकता है। तनाव की स्थिति में अपनी भावनाओं को दबाने के बजाय विश्वसनीय व्यक्ति से बातचीत करना भी आवश्यक है। परिवार, मित्रों, सहकर्मियों या परामर्शदाताओं से संवाद करने से व्यक्ति को भावनात्मक सहयोग मिल सकता है। यदि तनाव लंबे समय तक बना रहे, दैनिक जीवन प्रभावित होने लगे या व्यक्ति स्वयं स्थिति को संभालने में कठिनाई महसूस करे, योग्य मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से परामर्श लेना उचित है।
 स्वामी जी ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि तनाव को कमजोरी न समझें और मानसिक स्वास्थ्य को शारीरिक स्वास्थ्य के समान महत्व दें। स्वस्थ जीवनशैली, सकारात्मक सोच, संतुलित कार्य-जीवन तथा समय पर सहायता लेना तनाव प्रबंधन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।
कार्यक्रम का शुभारंभ शांति विद्या मंदिर के व्यवस्थापक मोहित प्रथानाचार्या रजनी संस्थान की फिरोजपुर शाखा की संयोजिका साध्वी करमाली भारती और दविंदर भारती द्वारा ज्योति प्रज्वलित कर किया गया।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button