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पूर्ण गुरु की शरण से ही भव सागर पार करना संभव: साध्वी करमाली भारती

पूर्ण गुरु की शरण से ही भव सागर पार करना संभव: साध्वी करमाली भारती

पूर्ण गुरु की शरण से ही भव सागर पार करना संभव: साध्वी करमाली भारती

फिरोजपुर: 7-9-2026: दिव्य ज्योति जागृति संस्थान, फिरोजपुर के स्थानीय आश्रम में श्रद्धा एवं आध्यात्मिक वातावरण में साप्ताहिक सत्संग कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लेकर सत्संग का लाभ उठाया। कार्यक्रम के दौरान भजन-कीर्तन, आध्यात्मिक विचारों और गुरु महिमा के माध्यम से भक्तों को आध्यात्मिक जीवन से जुड़ने का संदेश दिया गया।

इस अवसर पर श्री आशुतोष महाराज जी की परम शिष्या साध्वी करमाली भारती जी ने “भव सागर से पार होना केवल पूर्ण गुरु की शरण से ही संभव है” विषय पर विस्तारपूर्वक विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि मानव जीवन को अक्सर भव सागर के समान बताया गया है, जिसमें व्यक्ति मोह, चिंताओं, इच्छाओं और सांसारिक उलझनों में फंसकर अपने जीवन के वास्तविक उद्देश्य से दूर हो जाता है। इस भव सागर को पार करने के लिए केवल बाहरी ज्ञान या कर्मकांड पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि पूर्ण गुरु की शरण आवश्यक है।

पूर्ण गुरु की शरण से ही भव सागर पार करना संभव: साध्वी करमाली भारती

साध्वी करमाली भारती जी ने कहा कि पूर्ण गुरु की तलाश करना और उनकी शरण में जाना मानव जीवन के महत्वपूर्ण उद्देश्यों में से एक है। गुरु की कृपा से मनुष्य अपने भीतर विद्यमान ईश्वर के प्रकाश का अनुभव कर सकता है और भक्ति के मार्ग पर आगे बढ़ सकता है। जब व्यक्ति अपने भीतर ईश्वर के प्रकाश का अनुभव करता है तो उसकी सोच, जीवन के प्रति दृष्टिकोण और व्यवहार में सकारात्मक परिवर्तन आने लगता है।

उन्होंने कहा कि आज मनुष्य बाहरी सुख-सुविधाओं की प्राप्ति के लिए निरंतर भाग रहा है, लेकिन वास्तविक शांति और संतुष्टि आध्यात्मिक ज्ञान तथा ईश्वर से जुड़ने से ही प्राप्त होती है। पूर्ण गुरु व्यक्ति को सही आध्यात्मिक मार्ग दिखाते हुए उसे जीवन के वास्तविक उद्देश्य को समझने के लिए प्रेरित करते हैं।

संगत को प्रेरित करते हुए साध्वी जी ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को अपने दैनिक जीवन में सत्संग से जुड़ना चाहिए, गुरु की शिक्षाओं को समझना और उन्हें व्यवहार में अपनाना चाहिए। व्यक्ति के भीतर होने वाला सकारात्मक परिवर्तन उसके परिवार और समाज पर भी प्रभाव डालता है तथा प्रेम, सद्भाव और मानवीय मूल्यों को मजबूत करता है।

इस अवसर पर साध्वी हरजीत भारती जी ने भजन-कीर्तन प्रस्तुत किया। भजन-कीर्तन के दौरान पूरा आश्रम आध्यात्मिक वातावरण से सराबोर हो गया और श्रद्धालुओं ने भक्तिभाव से कीर्तन का आनंद लिया।

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