देव समाज शिक्षण संस्थान फिरोजपुर में दो दिवसीय सत्यधर्म बोध उत्सव का हुआ समापन
देव समाज शिक्षण संस्थान फिरोजपुर में दो दिवसीय सत्यधर्म बोध उत्सव का हुआ समापन
फिरोजपुर, 22-8-2026: देव समाज शिक्षण संस्थान फिरोजपुर में दिनांक 21-22 अगस्त 2026 को सत्य धर्म बोध उत्सव का आयोजन किया गया। देव समाज एक वैज्ञानिक धर्म है, जिसकी स्थापना परम पूजनीय भगवान देवात्मा ने 18 फरवरी 1887 में की। भगवान देवात्मा जी द्वारा रचित चार देव शास्त्रों से आत्मा का ज्ञान एवं बोध प्राप्त होता है। इसी लक्ष्य को मुख्य रखकर कि एक मनुष्य अपने नीच अनुरागों एवं नीच गतियों में कैसे मोक्ष प्राप्त कर सकता है और सेवाकारी हो सकता है, इन सत्संग तथा उत्सवों का आयोजन देव समाज की कार्यप्रणाली के अनुसार किया जाता है। इसी श्रृंखला में देव समाज शिक्षण संस्थान फिरोजपुर में 21-22 अगस्त को सत्य धर्म बोध उत्सव का आयोजन किया गया।
दिनांक 21-22 अगस्त 2026 को प्रथम सभा में देव समाज प्रबंध परिषद् की प्रधान और देव समाज कॉलेज शिक्षण संस्थान फिरोजपुर की चेयरपर्सन, प्रो. (डॉ.) अग्निजा ढिल्लों, सेक्रेटरी देव समाज, देव समाज कॉलेज प्रबंध समिति के काउंसलर श्रीमान रामविलास पाण्डेय, काउंसलर श्रीमान मनोज मदान, काउंसलर श्रीमान जगदीश राय गाबा, श्रीमान मानविंदर सिंह मांगट, मुख्य प्रशासनिक अधिकारी, मुख्य कार्यालय, सेक्टर 36-बी, चंडीगढ़, प्रतिनिधि सभा के सदस्य, संस्थान फिरोजपुर, धर्म संबंधियों, देव समाज संस्थान फिरोजपुर के सचिव श्री अजय बत्ता, सभी प्राचार्यों तथा सभी टीचिंग/नॉन-टीचिंग स्टाफ की भागीदारी में कार्यक्रम करवाया गया।
21 अगस्त 2026 की सभा का विवरण
21 अगस्त 2026 को पहली सभा का शुभारंभ भगवान देवात्मा की महिमा विषयक भजन के साथ शुरू हुआ। इस सभा के सभापति श्रीमान राम विलास पाण्डेय थे। आपने प्रवेश सभा करवाई और बताया कि हम किसी भी कार्य को अनुशासन में रहकर ही प्राप्त कर सकते हैं। नियमों के अनुसार चलकर ही हमारा विकास हो सकता है। हमें निंदा, चुगली, हानि आदि कर्मों से बचने की जरूरत है तथा सेवा, परोपकार, दया, सहनशीलता, श्रद्धा और कृतज्ञता में चलकर ही हमारे जीवन का भला हो सकता है। आपने इन विषयों से लोगों का ध्यान आकर्षित किया।
दिनांक 21-08-2026 को शाम 4 बजे श्रीमान मनोज मदान जी की सभा हुई, जिसका विषय था— “मनुष्य का विकास और रक्षा”।
सभापति मनोज मदान जी ने मनुष्य होने की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए मनुष्य के भक्तित्व के बहुआयामी पक्षों को परम पूजनीय भगवान देवात्मा की अधिभौतिक शिक्षा के अनुसार सबके समक्ष रखा और मनुष्य के विकास की गाथा तथा रक्षा के लिए अति आवश्यक नियमों को रोचक संस्मरणों द्वारा प्रस्तुत किया।
सभा में श्रीमान मनोज मदान ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि मनुष्य को किस प्रकार सेवा, परोपकार, कृतज्ञता और श्रद्धा का जीवन जीना चाहिए, जिससे मनुष्य अन्य जगतों (वनस्पति, भौतिक और पशु जगत) के साथ सामंजस्य स्थापित कर एक-दूसरे के अधिकारों की रक्षा करते हुए कर्तव्यों का निर्वाह करे और संपूर्ण विश्व में अमन एवं शांति का परचम लहराते हुए मानव के अस्तित्व पर गर्व करे।
सभापति जी ने भगवान देवात्मा के दर्शन पर आधारित विज्ञान-सम्मत शिक्षा पर आधारित संबंध-तत्व की विशेषता को उपस्थित लोगों के समक्ष रखा, जिससे मनुष्य मानवीयता का जीवन जीकर संपूर्ण सृष्टि को सुंदरतम रूप प्रदान कर सके।
22 अगस्त 2026 की पहली सभा
माननीय सेक्रेटरी देव समाज डॉ. अग्निजा ढिल्लों जी ने करवाई। आपकी सभा का विषय था— “Know the Self” (अपने आपको जानो)।
आपने बताया कि अपने आपको जानने में जो रुकावटें पेश आती हैं, उनके तीन कारण हैं—
- हमारे अंदर से मुख्य और गौण में अंतर समाप्त हो जाता है। मुख्य कार्य गौण हो जाते हैं और गौण को मुख्य समझा जाता है।
- मकसद और जरिए में फर्क हो जाता है। जैसे—हमारे जीवन का मकसद सेवा है, मगर कोठी, कार, जमीन और जायदाद मुख्य हो जाती है। आदमी स्वार्थी जीवन जीकर अपनी आत्मा का नाश करता है।
- इंसानों और घटनाओं को उल्टे रूप में देखता है। जैसे—अपने मां-बाप का उपकारी रूप नजर नहीं आता, बल्कि उन्हें तड़पाने-सताने लगता है तथा विकासवाद की समझ नहीं रखता।
इस प्रकार आपने वैज्ञानिक कार्ल मार्क्स, सिंग्मंड फ्रायड और सुकरात के उदाहरण देकर समझाया तथा पूर्व सेक्रेटरी देव समाज श्रद्धेय श्रीमान निर्मल सिंह की विचारधारा से परिचित करवाया। साथ ही श्रीमान सरदार हरनाम सिंह जी एवं श्रीमान जगदीश चन्द्र जी भारद्वाज के उच्च जीवन के दृष्टांत देकर उच्च उदाहरण प्रस्तुत किए। सभा बड़ी ही प्रभावशाली रही।
दोपहर 12:00 बजे सभा श्रीमान जगदीश राय जी गाबा ने करवाई। इस सभा में आपने इस उत्सव से प्राप्त लाभों के बारे में बताया तथा सभी का धन्यवाद किया। सत्संग में आए अन्य जनों ने भी देव समाज प्रबंध का धन्यवाद किया तथा आगे से कई प्रकार से अपने जीवनों को सुधारने की प्रतिज्ञा की। भगवान देवात्मा की जय-ध्वनि के साथ सभा की समाप्ति हुई।
इसके बाद दूसरे सत्र के दौरान देव समाज से संबंधित सभा में उपस्थित धर्म-प्रेमियों एवं शिक्षकों द्वारा देव समाज से जुड़ने के कारण उनके जीवन में पैदा हुए उच्च भावों एवं बदलावों से संबंधित अनुभवों को साझा किया गया।






