Ferozepur News
*आध्यात्मिक मार्ग पर चलकर इंसान अपने जीवन को सफल और सार्थक बना सकता है: साध्वी हरजीत भारती जी*
*आध्यात्मिक मार्ग पर चलकर इंसान अपने जीवन को सफल और सार्थक बना सकता है: साध्वी हरजीत भारती जी*
फिरोजपुर: 10-8-2026: दिव्य ज्योति जागृति संस्थान के फिरोजपुर स्थानीय आश्रम में श्रद्धा और भक्ति के साथ साप्ताहिक सत्संग प्रोग्राम का आयोजन किया गया। इस प्रोग्राम के दौरान भजन-कीर्तन, आध्यात्मिक विचारों और सत्संग के ज़रिए इंसानी जीवन के असली मकसद को समझने का संदेश दिया गया।
इस मौके पर संस्थान के संस्थापक एवं संचालक श्री आशुतोष महाराज जी की शिष्या साध्वी हरजीत भारती जी ने संगत को संबोधित करते हुए कहा कि इंसान को यह अनमोल जीवन कई जन्मों के बाद मिलता है। इसलिए इंसान का मकसद सिर्फ भौतिक सुख-सुविधाएं जमा करना या दुनियावी उपलब्धियां हासिल करना नहीं होना चाहिए। असली सफलता तब मिलती है जब इंसान अपने जीवन के असली मकसद को समझकर भगवान के साथ अपने रिश्ते को जानने की कोशिश करता है।
उन्होंने कहा कि आज का इंसान साइंस और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में बहुत तरक्की कर रहा है। जीवन को आसान बनाने के लिए कई साधन मौजूद हैं, लेकिन इसके बावजूद इंसान के अंदर शांति और संतुष्टि की कमी है। इसका मुख्य कारण यह है कि इंसान ने बाहरी दुनिया को जानने की कोशिश तो की है, लेकिन अपने अंदर झाँकने और अपने असली रूप को जानने पर कम ध्यान दिया है। साध्वी जी ने कहा कि आध्यात्मिकता इंसान को जीवन के असली मूल्यों से जोड़ती है। जब इंसान सच्चा आध्यात्मिक ज्ञान हासिल कर लेता है, तो उसके अंदर से अज्ञानता, डर, निराशा और अस्थिरता खत्म होने लगती है। वह धैर्य और हिम्मत के साथ जीवन की चुनौतियों का सामना करने के काबिल हो जाता है।
उन्होंने संगत को प्रेरित करते हुए कहा कि सत्संग इंसान के जीवन में अच्छे बदलाव लाने का एक अहम ज़रिया है। सत्संग से इंसान को अपने जीवन की कमियों को पहचानने और उन्हें दूर करने की प्रेरणा मिलती है। सेवा, ध्यान, नैतिकता, विनम्रता और दान जैसे गुणों को अपने जीवन का हिस्सा बनाकर, इंसान न केवल अपने जीवन को खुशहाल बना सकता है, बल्कि समाज में भी अच्छा माहौल बना सकता है। साध्वी जी ने आगे कहा कि आध्यात्मिक रास्ते का मतलब दुनियावी ज़िम्मेदारियों से भागना नहीं है, बल्कि ईमानदारी और लगन से अपनी ज़िम्मेदारियों को निभाते हुए अपने मन को भगवान से जोड़ना है।
इंसान अपने परिवार, समाज और काम की जगह के प्रति अपनी ज़िम्मेदारियों को निभाते हुए भी आध्यात्मिक जीवन जी सकता है। बस ज़रूरत है अपनी सोच और जीवन जीने की कला को सही दिशा देने की। उन्होंने कहा कि जब किसी की ज़िंदगी में आध्यात्मिकता आती है, तो नज़रिया बदल जाता है। इंसान हर इंसान में इंसानियत देखने लगता है और जात-पात, भेदभाव, नफ़रत और मतलब से ऊपर उठकर समाज की भलाई के लिए काम करने को प्रेरित होता है। आज के समय में ऐसी सोच की बहुत ज़रूरत है।
इस मौके पर साध्वी देविंदर भारती जी ने भक्ति भजन-कीर्तन गाया। भजन-कीर्तन के दौरान आश्रम का माहौल भक्ति से भर गया और संगत ने भक्ति के साथ भजन-कीर्तन का आनंद लिया।





