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*पूर्ण सतगुरु की शरण में जाने से ही कुकर्मों एवं विषय विकारों पर नियंत्रण मुमकिन है — साध्वी बलजीत भारती जी*

*पूर्ण सतगुरु की शरण में जाने से ही कुकर्मों एवं विषय विकारों पर नियंत्रण मुमकिन है — साध्वी बलजीत भारती जी*
*पूर्ण सतगुरु की शरण में जाने से ही कुकर्मों एवं विषय विकारों पर नियंत्रण मुमकिन है — साध्वी बलजीत भारती जी*
फिरोजपुर, 1-7-2026: दिव्य ज्योति जागृति संस्थान फिरोजपुर के स्थानीय आश्रम में साप्ताहिक सत्संग प्रोग्राम का आयोजन किया गया। इस दौरान संस्थान के संस्थापक और संचालक श्री आशुतोष महाराज जी की परम शिष्या साध्वी बलजीत भारती जी ने संगत को संबोधित करते हुए “गुरु भक्ति और बुराइयों पर नियंत्रण” विषय पर अपने प्रवचनों के ज़रिए इंसानी ज़िंदगी के रूहानी पहलू को विस्तार से समझाया।
उन्होंने कहा कि इंसानी ज़िंदगी भगवान की एक अनमोल देन है, लेकिन आज का इंसान काम, क्रोध, लोभ, मोह और अहंकार जैसी बुराइयों के असर में आकर अपनी ज़िंदगी की असली मंज़िल को भूलता जा रहा है। मन की चंचलता और इंद्रियों की इच्छाएं इंसान को अंदर की शांति से दूर ले जाती हैं। सिर्फ़ अपनी इच्छा शक्ति से इन बुराइयों पर काबू पाना बहुत मुश्किल है। इसलिए, सिर्फ़ पूरे सतगुरु की शरण और उनके दिए हुए ब्रह्म ज्ञान से ही इंसान को अंदर से ताकत मिलती है। साध्वी बलजीत भारती जी ने कहा कि जब कोई इंसान पूर्ण गुरु से जुड़कर नियमित साधना, नाम सिमरन और सेवा करता है, तो उसका मन पवित्र होने लगता है। धीरे-धीरे मन की बुराइयां दूर होने लगती हैं और दया, नम्रता, प्रेम, सहनशीलता और सेवा जैसे दैवीय गुण उसके जीवन का हिस्सा बन जाते हैं। गुरु भक्ति न सिर्फ इंसान को आध्यात्मिक ऊंचाई देती है, बल्कि उसे एक अच्छा इंसान, परिवार का अच्छा सदस्य और समाज के प्रति एक जिम्मेदार नागरिक भी बनाती है। उन्होंने आगे कहा कि आज के समाज में बढ़ती हिंसा, नशा, मानसिक तनाव, पारिवारिक कलह और नैतिक मूल्यों में गिरावट का मुख्य कारण इंसान का अपने आध्यात्मिक स्वभाव से दूर होना है। अगर कोई इंसान पूर्ण सतगुरु की शरण में जाकर ब्रह्म ज्ञान प्राप्त करे और उसके अनुसार जीवन जिए, तो न सिर्फ उसका अपना जीवन सुखी और शांतिपूर्ण हो सकता है, बल्कि समाज में भी प्रेम, भाईचारे और सद्भाव का माहौल बन सकता है। उन्होंने संगत को प्रेरित किया कि वे अपनी व्यस्त जिंदगी से कुछ समय भगवान की भक्ति, सत्संग, सेवा और साधना के लिए जरूर निकालें। जीवन को सार्थक, सफल और आनंदमय बनाने का यही सच्चा मार्ग है।
इस अवसर पर साध्वी हरजीत भारती जी ने भावपूर्ण भजनों के माध्यम से गुरु की महिमा और ईश्वर के नाम का गुणगान किया। भजनों ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया और संगत ने बड़े भाव से नाम सिमरन का जाप किया। अंत में पूरी संगत ने प्रसाद ग्रहण किया।

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