सीमावर्ती जिले से उठी नवाचार और स्टार्टअप की लहर
-डा. अनिरूद्ध गुप्ता का मॉडल बना मिसाल, पारंपरिक पढ़ाई से आगे बढक़र रोबोटिक्स, एआई व उद्यमिता पर फोक्स-
सीमावर्ती जिले से उठी नवाचार और स्टार्टअप की लहर
-डा. अनिरूद्ध गुप्ता का मॉडल बना मिसाल, पारंपरिक पढ़ाई से आगे बढक़र रोबोटिक्स, एआई व उद्यमिता पर फोक्स-

फिरोजपुर, 25-1-2026: देश के सामने सबसे बड़ी चुनौती बेरोजगार डिग्रीधारी नहीं, बल्कि डिग्री के बिना कौशलहीन शिक्षा है। इसी सोच को चुनौती देने के लिए सीमावर्ती जिले में डीसीएम ग्रुप ऑफ स्कूल्स के सीईओ डा. अनिरूद्ध गुप्ता विद्यार्थियो को रोजगार देने वाला नागरिक बनाने पर प्रयास कर रहे है। उनके द्वारा देश-विदेश विद्यार्थियो, शिक्षाविद्वो में शिक्षा के बदलते स्वरूप के बारे में जगाया जा रहा है। उनके प्रयासो की पंजाब के गवर्नर गुलाबचंद कटारिया के अलावा राज्य व केन्द्र सरकार के अनेको मंत्री सराहना कर चुके है।
गुप्ता बताते है कि 1946 में जब देश आजाद भी नहीं हुआ था तो एम.आर दास ने इंगलिश मीडियम प्राईवेट स्कूल की स्थापना की थी और उनकी सोच थी कि बच्चो को ऐसी शिक्षा मुहैया करवाएंगे जोकि उनके व्यवसायिक जीवन में काम आ सके। उसके बाद उन्हीं की सोच को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने काम शुरू किया और पारंपरिक शिक्षा के साथ-साथ बच्चो को तकनीकी शिक्षा देनी शुरू की। स्कूल में अटल टिंकरिंग लैब के माध्यम से विद्यार्थियो को समाजिक समस्याओ का तकनीक के माध्यम से समाधान करवाने पर प्रेरित किया तो यहां के विद्यार्थियो के प्रोजैक्ट राष्ट्र स्तर पर चयनित हुए। उनकी अध्यक्षता में स्कूलो में पारंपरिक शिक्षा के साथ-साथ आर्टीफिशियल इंटैलीजेंस, स्टार्टअप कल्चर, कोडिंग, रोबोटिक्स, डिजाइन थिंकिंग पर जोर दिया जा रहा है।

भारत-पाक सीमा से महज 6 किलोमीटर की दूरी पर सीमित संसाधनो के बावजूद अंतराष्ट्रीय सुविधाओ से लैस स्कूल की स्थापना करके उसे माइक्रोसोफ्ट शोकेज स्कूल बनाया। भारत सरकार के मेक इन इंडिया व आत्मनिर्भर भारत को पहल देते हुए उन्होंने लुधियाना में देश का पहला ऐसा यंग एंटरप्रिन्योर स्कूल खोला, जिसमें विद्यार्थियो को उनकी रूचि के मुताबिक शिक्षा प्रदान की जा रही है। उसके बाद उनके द्वारा पंचकूला में भी डीबैल्स एंटरप्रिन्योर स्कूल की स्थापना की। डा. गुप्ता ने कहा कि वह विद्यार्थियो में स्कूली जीवन से एंटरप्रिन्योरशिप और स्टार्टअप क्रिएटर के विचार भरना चाहते है ताकि भविष्य में उन्हें नौकरी ना मांगनी पड़े और वह खुद लोगो को नौकरी दे। युवाओ को स्टार्टअप की तरफ आकर्षित करने के उद्देश्य से उनके द्वारा फिरोजपुर एंटरप्रिन्योर एंड बिजनैस अवार्ड भी शुरू किया गया है, जिसके तहत सरहदी जिले में बेहतरीन व्यापारिक कार्य करने वालो को सम्मानित किया जाता है।
अनिरूद्ध गुप्ता की सोच रही है कि स्कूल में ही विद्यार्थियो को नीट, जेइई मैन्स, जेईई एडवांस, कलैट सहित अन्य प्रतियोगात्मक परीक्षाओ की तैयारी हो। ताकि स्कूल में ही विद्यार्थी को वह तमाम शैक्षणिक सुविधाए मिले, ताकि पारंपरिक शिक्षा के साथ-साथ उसका सर्वांगीण विकास हो सके। उनकी प्रेरणा के बाद उनके हजारो विद्यार्थी इस समय आईएएस, आईपीएस, डॉक्टर, इंजीनियर सहित देश-विदेश के अहम पदो में अपनी सेवाए निभा रहे है। उनके द्वारा स्कूल में खोली गई लैब में विद्यार्थी आए दिन नए-नए अविष्कार कर रहे है, जिन्हें भारत सरकार द्वारा भी चयनित किया जा रहा है।
सीमावर्ती जिले में सीमित संसाधनो के बावजूद डा. अनिरूद्ध गुप्ता ने शिक्षा को नया रूप देने में अहम भूमिका निभाई है। उनका कहना है कि जब शिक्षा में हुनर, तकनीक और उद्यमिता का समावेश होगा, तभी भारत का गणतंत्र आत्मनिर्भर और सशक्त होगा। उन्होंने कहा कि मजबूत गणतंत्र की नींव वहीं शिक्षा रख सकती है, जो बच्चो को परीक्षाओ में सफल बनाने के साथ-साथ उन्हें जीवन में रोजगार के लिए तैयार करे। अनिरूद्ध गुप्ता ने कहा कि गणतंत्र की मजबूती केवल मजबूत सीमाओ से नहीं बल्कि मजबूत सोच वाले युवाओ से होती है।




