पंजाब के किसानों ने बिजली संशोधन विधेयक 2025 का विरोध किया; माँगों की अनदेखी पर राज्यव्यापी आंदोलन की चेतावनी
पीएसपीसीएल के अध्यक्ष और प्रधानमंत्री को ज्ञापन सौंपा
पंजाब के किसानों ने बिजली संशोधन विधेयक 2025 का विरोध किया; माँगों की अनदेखी पर राज्यव्यापी आंदोलन की चेतावनी
पीएसपीसीएल के अध्यक्ष और प्रधानमंत्री को ज्ञापन सौंपा

फिरोजपुर, 18-7-2025: पंजाब की पाँच किसान जत्थेबंदियों ने आज पंजाब भर में बिजली दफ्तरों के सामने सुबह 11 बजे से दोपहर 2 बजे तक जोरदार रोष प्रदर्शन किया। ये प्रदर्शन मोगा, जीरा-फिरोजपुर, कोटकपूरा, कपूरथला, फरीदकोट, रामपुरा, मानसा, जालंधर, अजनाला, बटाला, भिखी विंड, लुधियाना, तलवाड़ा, होशियारपुर, रोपड़, पटियाला, भोगपुर, अमृतसर आदि स्थानों पर हुए।
इन प्रदर्शनों को संबोधित करते हुए सुरजीत सिंह फूल, दिलबाग सिंह गिल, बलदेव सिंह जीरा, बलवंत सिंह बहिरामके, जंग सिंह भटेरी, मलकीत सिंह गुलामी वाला, सुखविंदर कौर, बलकार सिंह बैस, गुरध्यान सिंह भटेरी समेत वक्ताओं ने कहा कि आज के विरोध प्रदर्शन की मुख्य माँग केंद्र सरकार से है कि मानसून सत्र में पेश होने जा रहे बिजली संशोधन विधेयक 2025 को संसद में पेश न किया जाए।

क्योंकि पहले ही बिजली उत्पादन और ट्रांसमिशन को निजी हाथों में दिया जा चुका है, जिससे बिजली की दरें आसमान छू रही हैं। प्रस्तावित विधेयक के पारित हो जाने पर वितरण भी अडानी जैसे पूंजीपतियों को सौंप दिया जाएगा, जिससे सरकार का बिजली पर कोई नियंत्रण नहीं रहेगा और महंगाई और भी बढ़ेगी।
वक्ताओं ने कहा कि किसान संगठन इस जनविरोधी बिल के खिलाफ जनता को साथ लेकर बड़ी लड़ाई लड़ेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार द्वारा जबरदस्ती लगाए जा रहे “चिप मीटरों” का संबंध भी इसी बिल से है। चिप वाले मीटर लगने से बिजली एडवांस पेमेंट पर मिलेगी और अडानी जैसी कंपनियों को लूट का खुला मौका मिलेगा – जिसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
इसके अतिरिक्त जत्थेबंदियों ने माँग की कि जिन किसानों के खेतीबाड़ी मोटरों के डिमांड नोटिस दशकों से लंबित पड़े हैं, उन्हें तुरंत कनेक्शन दिए जाएं। मोटरों की लोड बढ़ाने की फीस जो अब 7600 रुपये प्रति हॉर्स पावर है, उसे घटाकर 1000 रुपये प्रति हॉर्स पावर किया जाए। किसान की मृत्यु के बाद कनेक्शन को उसके सभी कानूनी वारिसों में बाँटने की योजना शुरू की जाए।
उन्होंने आरोप लगाया कि 600 यूनिट मुफ्त बिजली योजना में भी आम आदमी पार्टी सरकार शर्तें जोड़कर उसे सीमित करने की कोशिश कर रही है, जो बिल्कुल बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
वक्ताओं ने माँग की कि ठेकेदारी व्यवस्था को खत्म कर बिजली विभाग का पूरा प्रबंधन सरकार खुद संभाले और सभी ठेका कर्मचारियों को नियमित सरकारी कर्मचारी बनाया जाए। अलग-अलग स्थानों पर बिजली कर्मचारियों की अग्रणी यूनियन “टेक्निकल सर्विस यूनियन” ने इस प्रोग्राम का समर्थन किया।
इकट्ठ में यह प्रस्ताव भी पास हुआ कि लैंड पूलिंग नीति के तहत किसानों की ज़मीनों को हड़पना बंद किया जाए। अमेरिका के साथ जो समझौते की बातचीत चल रही है, उसमें से कृषि और डेयरी सेक्टर को बाहर रखा जाए। अमेरिकी जीन परिवर्तित (GMO) फसलों को जो लोगों की सेहत के लिए हानिकारक हैं, देश में प्रवेश न करने दिया जाए।
अंत में पंजाब स्टेट पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड के चेयरमैन और प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा गया।
वक्ताओं ने चेतावनी दी कि यदि माँगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो सरकार को तेज़ और तीखा संघर्ष झेलने के लिए तैयार रहना चाहिए।





