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*महामाई संकीर्तन कथा के तीसरे दिवस पर पार्वती विवाह का आध्यात्मिक संदेश*

*गुरु के वचनों पर अटूट विश्वास से ही संभव है जीवन का आध्यात्मिक परिवर्तन : साध्वी दविंदर भारती जी*

*महामाई संकीर्तन कथा के तीसरे दिवस पर पार्वती विवाह का आध्यात्मिक संदेश*
*महामाई संकीर्तन कथा के तीसरे दिवस पर पार्वती विवाह का आध्यात्मिक संदेश*
*गुरु के वचनों पर अटूट विश्वास से ही संभव है जीवन का आध्यात्मिक परिवर्तन : साध्वी दविंदर भारती जी*
फिरोजपुर, 17-10-2026: दिव्य ज्योति जागृति संस्थान, की ओर से शिव मंदिर, ममदोट, फिरोजपुर में नवरात्रों के पावन अवसर पर आयोजित महामाई संकीर्तन कथा के तीसरे दिवस में श्रद्धालुओं ने उत्साह एवं भक्तिभाव के साथ भाग लिया। इस अवसर पर श्री आशुतोष महाराज जी की परम शिष्या साध्वी दविंदर भारती जी ने महामाई का गुणगान करते हुए पार्वती विवाह के प्रसंग की आध्यात्मिक व्याख्या की। उन्होंने बताया कि यह प्रसंग मनुष्य को गुरु के वचनों पर विश्वास रखने, धैर्य बनाए रखने और अपने आध्यात्मिक लक्ष्य के प्रति दृढ़ रहने की प्रेरणा देता है।
साध्वी जी ने बताया कि माता पार्वती का जीवन दृढ़ संकल्प, तपस्या, समर्पण और अटूट विश्वास का प्रतीक है। उनके जीवन से यह शिक्षा मिलती है कि किसी भी महान लक्ष्य की प्राप्ति के लिए केवल इच्छा करना पर्याप्त नहीं होता, बल्कि उसके प्रति निष्ठा, धैर्य और निरंतर प्रयास भी आवश्यक हैं। आध्यात्मिक मार्ग पर चलने वाले साधक के लिए गुरु के मार्गदर्शन का विशेष महत्व होता है, क्योंकि गुरु मनुष्य को जीवन के वास्तविक उद्देश्य से परिचित करवाते हैं। उन्होंने कहा कि कई बार मनुष्य जीवन में कठिनाइयों का सामना करते हुए निराश हो जाता है। वह अपनी परिस्थितियों के अनुसार अपने विचार और निर्णय बदलने लगता है। लेकिन जो व्यक्ति अपने गुरु के मार्गदर्शन पर विश्वास रखता है, वह विपरीत परिस्थितियों में भी धैर्य और विवेक बनाए रखने का प्रयास करता है। गुरु के वचन केवल सुनने के लिए नहीं, बल्कि उन्हें समझकर अपने आचरण में उतारने के लिए होते हैं।
साध्वी दविंदर भारती जी ने समझाया कि गुरु के प्रति सच्ची श्रद्धा का अर्थ आंख मूंदकर किसी बात को स्वीकार करना नहीं, बल्कि आध्यात्मिक ज्ञान को समझना, अपने जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाना और सत्य के मार्ग पर चलना है। जब साधक गुरु द्वारा दिखाए गए मार्ग पर ईमानदारी से आगे बढ़ता है, तो उसके भीतर आत्मविश्वास, विनम्रता और विवेक का विकास होता है।
       उन्होंने आगे कहा कि माता पार्वती की तपस्या से प्रेरणा लेकर प्रत्येक व्यक्ति को अपने जीवन में संयम, दृढ़ता और समर्पण के गुण विकसित करने चाहिए। आज के समय में मनुष्य छोटी-छोटी कठिनाइयों से घबरा जाता है और शीघ्र परिणाम प्राप्त करने की अपेक्षा करता है। जबकि जीवन के वास्तविक परिवर्तन के लिए निरंतर प्रयास और सही मार्गदर्शन आवश्यक हैं।
साध्वी जी ने श्रद्धालुओं को प्रेरित किया कि वे गुरु के ज्ञान को अपने जीवन का आधार बनाएं, परिवार एवं समाज के प्रति अपने कर्तव्यों का पालन करें और सदैव सत्य, प्रेम तथा सेवा के मार्ग पर चलें। गुरु के वचनों को जीवन में धारण करने से ही आध्यात्मिक विचार व्यवहार में परिवर्तित होते हैं और व्यक्ति अपने जीवन को सही दिशा प्रदान कर सकता है। कार्यक्रम के दौरान महामाई के भजनों और संकीर्तन से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। श्रद्धालुओं ने महामाई की महिमा का गुणगान करते हुए आध्यात्मिक संदेशों को आत्मसात किया। इस प्रकार महामाई संकीर्तन कथा का तीसरा दिवस गुरु-श्रद्धा, विश्वास और समर्पण की प्रेरणा के साथ संपन्न हुआ।

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