फिरोजपुर में बॉर्डर एम.यू.एन 2.0 का आयोजन 25 व 26 को दास एंड ब्राऊन में
-बार्डर जिलो के 500 से ज्यादा डैलिगेट्स करेंगे नेताओ का प्रतिनिधित्व
फिरोजपुर में बॉर्डर एम.यू.एन 2.0 का आयोजन 25 व 26 को दास एंड ब्राऊन में
-बार्डर जिलो के 500 से ज्यादा डैलिगेट्स करेंगे नेताओ का प्रतिनिधित्व, –
फिरोजपुर, 21 जुलाई, 2026
डीसीएम ग्रुप ऑफ स्कूल्स द्वारा 80 वर्ष पूरे करने के उपलक्ष्य में बॉर्डर एम.यू.एन 2.0 फ्राम बैटल फील्ड टू बोर्डरूम्स का आयोजन किया जा रहा है, जिसका थीम वल्र्ड इन कंफलिक्ट फ्राम वैस्ट एशिया टू द इंडो पैसिफिक रखा गया है। दो दिवसीय इस कार्यक्रम में विद्यार्थियों द्वारा इजरायल हामस कंफलिक्ट, रशिया यूक्रेन कंफलिक्ट, ईरान इजरायल टैंशन, चाइना ताइवान कंफलिक्ट के अलावा गलोबल वार पर खुलकर चर्चा की जाएगी।
डीसीएम ग्रुप के प्रवक्ता विक्रमादित्या शर्मा ने बताया कि 25 और 26 जुलाई को बॉर्डर एम.यू.एन दास एंड ब्राऊन वल्र्ड स्कूल में आठवी से बाहरवी तक के विद्यार्थियो के मध्य हो रहा है और इसमें राज्य के बॉर्डर जिलो सहित आसपास के क्षेत्रो जैसे कि पुणे, श्री गंगानगर, आस्ट्रेलिया, दुबई, अंबाला, कोटकपूरा, लुधियाना, हिसार, पंचकूला, अमृतसर, फाजिल्का, गुरदासपुर, पठानकोट, श्री मुक्तसर साहिब, मोगा के स्कूलो के विद्यार्थी हिस्सा ले रहे है। इसमें वाघा से लेकर हुसैनीवाला तक के 500 से ज्यादा डैलिगेट्स हिस्सा ले रहे है।
उन्होंने बताया कि इस कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए 7 कमेटियो का गठन किया गया है, जिसमें यूनाइटेड नैशन जनरल असैंबली, यूनाइटेड नैशन सिक्योरिटी काऊंसिल, यूनाइटिड नैशन हयूमन राइटस काऊंसिल, डिस आर्मामेंट एंड इंटरनैशनल सिक्योरिटी कमेटी, लोकसभा, नार्थ एटलांटिक ट्रिटी आग्रेनाइजेशन, कमेटी फार रैपिड इंटरनैशनल स्ट्रेटेजिक एमरजैंसी सिमूलेशन शामिल है। हर कमेटी को एक एजेंडा दिया जाएगा है, जिसमें डेलिगेट को किसी ना किसी देश के नेता के रूप में नेतृत्व करने का मौका भी मिलेगा। उन्होंने बताया कि इस कार्यक्रम के चीफ एडवाइजर मुस्तफा कपासी है, जबकि चैयरपर्सन ललित परिंजा, आदित्या राज सिह चुदासवा, धु्रवराज ङ्क्षसह झाला, सेजन अगावन, सिद्धार्थ गुप्ता, श्रेय जोशी, जाहनवी कौशल है। कार्यक्रम के दौरान सभी डेलिगेट्स का हुसैनीवाला इंडो-पाक बार्डर पर रिट्रीट सैरेमनी पर भी विजिट करवाया जाएगा।
कन्वीनर स्तुति सचदेवा ने बताया कि इस एम.यू्.एन में सात कमेटियों के पांच-पांच सेशन मिलाकर दो दिनों में कुल 35 सैशन आयोजित होंगे। उन्होंने बताया कि यह सम्मेलन इस बात को उजागर करने का प्रयास करता है कि जहाँ युद्ध मैदान में लड़े जा सकते हैं, वहीं स्थायी शांति संवाद, वार्ता और नेतृत्व के माध्यम से स्थापित होती है। उन्होंने बताया कि बताया यह युवाओं को संघर्ष की गंभीरता और शांति स्थापना की जिम्मेदारी को समझने के लिए प्रेरित करता है। युद्धभूमि के साहस का सम्मान करने से लेकर बोर्डरूम की कला को आत्मसात करने तक, यह सम्मेलन युवाओं की बदलती भूमिका का एक सशक्त उदाहरण प्रस्तुत करता है, जो एक अधिक सुरक्षित और शांतिपूर्ण विश्व के निर्माण में योगदान दे रहे हैं।





