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“परंपरा और दृष्टि से प्रेरित: डीसीएम में होम्योपैथी सीएमई”

“परंपरा और दृष्टि से प्रेरित: डीसीएम में होम्योपैथी सीएमई”

“परंपरा और दृष्टि से प्रेरित: डीसीएम में होम्योपैथी सीएमई”

फिरोज़पुर, 29-9-2025; डीसीएम में हाल ही में एक जीवंत कंटिन्यूइंग मेडिकल एजुकेशन (CME) कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें राजस्थान और पंजाब से आए अनेक चिकित्सकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। यह कार्यक्रम डॉ. अनिरुद्ध गुप्ता की उस दूरदृष्टि का हिस्सा था, जिसके अंतर्गत उन्होंने डीसीएम में दशकों पुरानी परंपरा को पुनर्जीवित करने का संकल्प लिया है, जब यहाँ नियमित रूप से होम्योपैथी सीएमई आयोजित हुआ करती थी।

कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण डॉ. पियूष का सत्र रहा, जो अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त होम्योपैथिक चिंतक एवं चिकित्सक डॉ. राजन शंकरन के शिष्य हैं। डॉ. पियूष ने होम्योपैथी के प्रिस्क्रिप्शन में उपयोग होने वाले सरल परंतु प्रभावी उपकरणों को प्रस्तुत किया, जिससे जटिल विचारों को चिकित्सकों के लिए सरल और व्यावहारिक रूप दिया जा सका।

डॉ. पियूष ने कहा, “होम्योपैथी में अपार संभावनाएँ हैं, यदि इसे स्पष्टता और सादगी के साथ अपनाया जाए। मेरा उद्देश्य ऐसे उपकरण साझा करना है, जिनसे चिकित्सक अपने मरीजों को लगातार भरोसेमंद परिणाम दे सकें।”

इस अवसर पर डॉ. राजन शंकरन ने भी वीडियो संदेश के माध्यम से प्रतिभागियों को संबोधित किया। उन्होंने चिकित्सकों से आग्रह किया कि वे होम्योपैथी के सिद्धांतों पर डटे रहें और शॉर्टकट्स या बिखरे हुए तरीकों से बचें।

यह आयोजन समान विचारधारा वाले चिकित्सकों को एक साथ लाने का मंच बना, जिसमें सहयोग, ज्ञान-साझाकरण और सेवा की भावना को प्रोत्साहन मिला। प्रतिभागियों ने इस पुनर्जीवित परंपरा पर खुशी जताई और मानवता की सेवा हेतु विश्वसनीय होम्योपैथिक परिणाम प्रदान करने की प्रेरणा प्राप्त की।

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