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*नशा समाज को बर्बाद कर रहा है, युवाओं को इससे बचाना हम सबकी साझी ज़िम्मेदारी है — साध्वी देविंदर भारती जी*

*नशा समाज को बर्बाद कर रहा है, युवाओं को इससे बचाना हम सबकी साझी ज़िम्मेदारी है — साध्वी देविंदर भारती जी*
फ़िरोज़पुर: 9-9-2026: नशा आज हमारे समाज के लिए एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। नशे के बुरे असर से न सिर्फ़ युवाओं का भविष्य खराब हो रहा है, बल्कि परिवारों की खुशहाली, सामाजिक ताना-बाना और देश की तरक्की पर भी असर पड़ रहा है। आज देश के युवा ही देश की रीढ़ हैं। अगर हमारे युवा नशे की खाई में गिरते रहेंगे, तो समाज और देश को आगे कौन ले जाएगा?

ये विचार दिव्य ज्योति जागृति संस्थान, फ़िरोज़पुर द्वारा गाँव कालू के हिठाड में आयोजित नशा विरोधी जागरूकता कार्यक्रम के दौरान संस्थान के संस्थापक और संचालक श्री आशुतोष महाराज जी की परम शिष्या साध्वी देविंदर भारती जी ने व्यक्त किए।
साध्वी देविंदर भारती जी ने कहा कि नशा एक ऐसी सामाजिक बुराई है जो धीरे-धीरे इंसान की शारीरिक, मानसिक और सामाजिक ताकत को कमज़ोर कर देती है। ड्रग्स की लत सिर्फ़ उस इंसान पर ही असर नहीं डालती जो ड्रग्स लेता है, बल्कि इसका सीधा असर उसके परिवार और आस-पास के समाज पर भी पड़ता है। कई परिवार आर्थिक, मानसिक और सामाजिक तौर पर बर्बाद हो जाते हैं।

उन्होंने कहा कि ‘बोध’ नाम के नशा उन्मूलन प्रोजेक्ट के तहत, दिव्य ज्योति जागृति संस्थान की तरफ से देश में अलग-अलग जगहों पर नशा उन्मूलन प्रोग्राम किए जाते हैं। इन प्रोग्राम के ज़रिए युवाओं और आम लोगों को नशे के बुरे असर के बारे में जागरूक किया जाता है और उन्हें हेल्दी और पॉजिटिव ज़िंदगी जीने के लिए मोटिवेट भी किया जाता है।
साध्वी जी ने कहा कि नशे की समस्या से निपटने के लिए सिर्फ़ नियम बनाना या सज़ा देना काफ़ी नहीं है। इस समस्या की जड़ तक पहुँचना बहुत ज़रूरी है। जब तक युवाओं की सोच और ज़िंदगी के नज़रिए पर काम करके उनके मन में पॉजिटिव बदलाव नहीं लाए जाते, तब तक ड्रग्स की समस्या को पूरी तरह खत्म करना मुश्किल है।
उन्होंने कहा कि *श्री आशुतोष महाराज जी अक्सर समझाते हैं कि बीमारी की जड़ पर काम करना चाहिए।* हर बुरे काम की जड़ मन होता है और मन को सही दिशा देने के लिए अंदरूनी जागरूकता और आध्यात्मिक ज्ञान की ज़रूरत होती है। संस्थान का मानना है कि ईश्वरीय ज्ञान से इंसान अपने अंदर के संस्कारों को जगा सकता है और अपनी ज़िंदगी में अच्छे बदलावों की तरफ बढ़ सकता है। साध्वी जी ने पुराने उदाहरण देते हुए कहा कि *उंगली माल और सज्जन ठग जैसे लोगों की ज़िंदगी में भी संतों और महापुरुषों की संगति और आध्यात्मिक जागृति से बड़ा बदलाव आया। इसी तरह आज भी अगर युवाओं को सही मार्ग दर्शन, अच्छी संगत और अपनी ज़िंदगी के मकसद की समझ मिले, तो वे नशे से दूर रहकर अपनी ताकत देश और समाज की भलाई के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि युवाओं की एनर्जी देश की सबसे बड़ी ताकत है। इस एनर्जी को नशे पर बर्बाद करने के बजाय, इसे पढ़ाई, खेल, सेवा, क्रिएटिव कामों और समाज भलाई के कामों में लगाने की ज़रूरत है। इसलिए माता-पिता, टीचर, धार्मिक और सामाजिक संस्थाएं और समाज के हर वर्ग को मिलकर कोशिश करनी चाहिए। प्रोग्राम के दौरान मौजूद संगत और युवाओं को नशे से दूर रहने, अपने आस-पास के लोगों को जागरूक करने और एक हेल्दी, नशा-मुक्त और अच्छे समाज के निर्माण में योगदान देने के लिए प्रेरित किया गया।




