पंजाब के राज्यपाल की अध्यक्षता में सहकारिता के भविष्य में AI की भूमिका पर सत्र आयोजित; एसबीएसएसयू के कुलपति प्रो. शर्मा ने बताया AI को गेम चेंजर
विकसित भारत 2047

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पंजाब के राज्यपाल की अध्यक्षता में सहकारिता के भविष्य में AI की भूमिका पर सत्र आयोजित; एसबीएसएसयू के कुलपति प्रो. शर्मा ने बताया AI को गेम चेंजर
हरिश मोंगा
फिरोजपुर, 19 जुलाई: कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence-AI) भारत के सहकारी क्षेत्र को अधिक स्मार्ट, तेज़ और डेटा-आधारित निर्णय प्रणाली से सशक्त बनाकर इसमें क्रांतिकारी बदलाव ला सकती है। यह बात शहीद भगत सिंह स्टेट यूनिवर्सिटी (एसबीएसएसयू), फिरोजपुर के कुलपति प्रो. सुरेश कुमार शर्मा ने कही।
चंडीगढ़ सिविल सचिवालय में पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया की अध्यक्षता में आयोजित “सहकारिता का भविष्य” विषयक प्रस्तुति में प्रो. शर्मा ने कृषि, डेयरी, सहकारी बैंकिंग और विपणन क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तथा मशीन लर्निंग (ML) की अपार संभावनाओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारत में आठ लाख से अधिक सहकारी समितियां 30 करोड़ से अधिक सदस्य परिवारों से जुड़ी हुई हैं और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं।
उन्होंने कहा कि AI की मदद से निर्णय लेने की धीमी प्रक्रिया, कम लाभप्रदता, मैनुअल रिकॉर्ड प्रबंधन, सीमित बाजार जानकारी तथा जलवायु संबंधी अनिश्चितताओं जैसी पुरानी चुनौतियों का समाधान किया जा सकता है। डेटा-आधारित पूर्वानुमान, स्वचालन और निर्णय सहायता प्रणाली सहकारी संस्थाओं की कार्यक्षमता में उल्लेखनीय सुधार ला सकती है।
प्रो. शर्मा ने बताया कि सहकारी बैंकिंग में AI क्रेडिट स्कोरिंग, ऋण स्वीकृति, धोखाधड़ी की पहचान और जोखिम मूल्यांकन को अधिक प्रभावी बनाकर गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों (NPA) को कम करने और पारदर्शिता बढ़ाने में सहायक होगा। कृषि क्षेत्र में AI फसल रोगों की पहचान, उत्पादन का पूर्वानुमान, प्रिसिजन फार्मिंग तथा सिंचाई प्रबंधन में उपयोगी सिद्ध हो रहा है। वहीं डेयरी सहकारी संस्थाओं में दूध की गुणवत्ता जांच, पशुओं के स्वास्थ्य की निगरानी और कोल्ड-चेन प्रबंधन को भी AI नई दिशा दे रहा है।
उन्होंने अमूल, इफको, नाबार्ड और ई-नाम (eNAM) जैसी सफल पहलों का उल्लेख करते हुए कहा कि ये उदाहरण दर्शाते हैं कि AI पहले से ही भारत के सहकारी तंत्र में सकारात्मक परिवर्तन ला रहा है।
भविष्य की चर्चा करते हुए प्रो. शर्मा ने कहा कि जनरेटिव AI, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), ब्लॉकचेन और रोबोटिक्स जैसी उभरती तकनीकें “स्मार्ट कोऑपरेटिव 2035” की अवधारणा को साकार करेंगी, जो कागजरहित, पारदर्शी और जलवायु-अनुकूल सहकारी व्यवस्था का आधार बनेगी।
उन्होंने कहा कि AI सहकारी संस्थाओं का विकल्प नहीं बनेगा, बल्कि उन्हें अधिक उत्पादक, पारदर्शी, लाभदायक और समावेशी बनाने का सशक्त माध्यम सिद्ध होगा तथा “विकसित भारत 2047” के लक्ष्य को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।





