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*केवल ब्रह्म ज्ञान से ही इंसान अपने अंदर बिराजमान ईश्वर को जान सकता है: साध्वी करमाली भारती जी*
*केवल ब्रह्म ज्ञान से ही इंसान अपने अंदर बिराजमान ईश्वर को जान सकता है: साध्वी करमाली भारती जी*¨

फिरोजपुर, जून 15, 2026::दिव्य ज्योति जागृति संस्थान फिरोजपुर के स्थानीय आश्रम में भक्ति और आध्यात्मिक उत्साह के साथ रविवार का साप्ताहिक सत्संग प्रोग्राम हुआ। इस पवित्र मौके पर सर्व श्री आशुतोष महाराज जी की परम शिष्या साध्वी करमाली भारती जी ने संगत को संबोधित करते हुए कहा कि”ईश्वर” हमेशा गुरु के रूप में धरती पर रहते हैं ।
उन्होंने कहा कि इंसानी ज़िंदगी का मुख्य मकसद ईश्वर को पाना है। सदियों से ईश्वर इंसानियत की भलाई के लिए धरती पर पूर्ण गुरु के रूप में अवतरित होते रहे हैं और सत्य की तलाश करने वालों को उस परम सत्य से जोड़ने का काम करते रहे हैं। वेदों, उपनिषदों और धार्मिक ग्रंथों में पूर्ण गुरु की महिमा और उनकी पहचान के बारे में विस्तार से बताया गया है। हमारे महान गुरुओं ने भी इंसान को सच्चे गुरु की शरण में जाकर अपना जीवन सफल बनाने की शिक्षा दी है। साध्वी जी ने कहा कि आज इंसान बाहरी दिखावे, रीति-रिवाजों और भौतिक सुखों में भगवान को ढूंढने की कोशिश कर रहा है, जबकि भगवान का असली ठिकाना इंसान की अपनी अंतरात्मा है। शरीर ही वह मंदिर है जिसके अंदर भगवान का प्रकाश मौजूद है। पूर्ण सतगुरु की कृपा से मिला दिव्य ज्ञान इंसान को अपने अंदर झांकने और उस परम चेतना को देखने की क्षमता देता है। जब इंसान अपने अंदर भगवान के होने का अनुभव करता है, तो उसका जीवन सचमुच आनंदमय और सार्थक हो जाता है।

उन्होंने आगे कहा कि आज के समय में पूरी दुनिया में हिंसा, नफरत, असहिष्णुता और अशांति का माहौल है। इंसान ने साइंस और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में बहुत तरक्की की है, लेकिन मन की शांति से दूर हो गया है। जब तक इंसान का मन शांत नहीं होगा, तब तक समाज और दुनिया में स्थायी शांति स्थापित करना संभव नहीं है। इसलिए, दुनिया में शांति का असली आधार ब्रह्म ज्ञान है, जो इंसान को इंसान से और इंसान को भगवान से जोड़ता है।
साध्वी करमाली भारती जी ने पूरी संगत को प्रेरित करते हुए कहा कि उन्हें अपनी व्यस्त जिंदगी से प्रभु सिमरन, सत्संग और सेवा के लिए कुछ समय जरूर निकालना चाहिए। सत्संग से इंसान के विचार शुद्ध होते हैं, सेवा से अहंकार दूर होता है और ईश्वरीय ज्ञान से जीवन को सही दिशा मिलती है। इन तीनों के मेल से इंसान न सिर्फ अपनी ज़िंदगी को खुशहाल और संतुलित बना सकता है, बल्कि समाज की भलाई में भी अपना योगदान दे सकता है।
इस मौके पर दुनिया में शांति, इंसानियत की भलाई और आपसी भाईचारे को मज़बूत करने के लिए प्रार्थना भी की गई। साध्वी जी ने कहा कि धर्म का असली संदेश इंसान को इंसान से जोड़ना है, बांटना नहीं। जब हर इंसान अपने अंदर बैठे भगवान को पहचान लेगा, तो आपसी वैमनस्य अपने आप खत्म हो जाएगा और एक शांत और खुशहाल समाज बनेगा।
कार्यक्रम के दौरान सर्व श्री आशुतोष महाराज जी की परम शिष्या साध्वी देविंदर भारती जी ने भावपूर्ण भजन-कीर्तन किया। उनके भक्ति भाव से भरे भजनों ने संगत को नाम सिमरन और गुरु की भक्ति करने के लिए प्रेरित का। मौजूद संगत ने पूरी श्रद्धा और एकाग्रता के साथ सत्संग का लाभ उठाया और आध्यात्मिक जीवन में आगे बढ़ने का संकल्प लिया। इस पवित्र सत्संग कार्यक्रम में बड़ी संख्या में भक्तों ने हिस्सा लिया और गुरु के चरणों का आशीर्वाद प्राप्त किया।





