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कश्मीर की लाल-सुर्ख चेरी अब रेल की रफ्तार से मुंबई, वडोदरा और सूरत तक’ — फिरोजपुर मंडल की अहम भूमिका

कश्मीर की लाल-सुर्ख चेरी अब रेल की रफ्तार से मुंबई, वडोदरा और सूरत तक’ — फिरोजपुर मंडल की अहम भूमिका

“’कश्मीर की लाल-सुर्ख चेरी अब रेल की रफ्तार से मुंबई, वडोदरा और सूरत तक’ — फिरोजपुर मंडल की अहम भूमिका।”

फिरोजपुर, 1-6-2026: गर्मी के मौसम में कश्मीर की मशहूर रसीली चेरी अब रेल की तेज रफ्तार के माध्यम से देश के बड़े बाजारों तक पहुंचने लगी है। चेरी उत्पादकों के लिए राहत भरी खबर है कि चेरी अमृतसर से पश्चिम रेलवे के बांद्रा, वडोदरा तथा सुरत के लिए भेजी जा रही है। इस परिवहन व्यवस्था में फिरोजपुर मंडल की महत्वपूर्ण भूमिका रही है तथा अमृतसर रेलवे स्टेशन द्वारा पार्सल लोडिंग एवं संचालन की उत्कृष्ट व्यवस्था सुनिश्चित की गई है।
इस मई माह में लगभग 12.97 टन प्रीमियम गुणवत्ता की चेरी अमृतसर से पार्सल-एस.एल.आर. सर्विस के माध्यम से लोड की गई है। इसमें करीब 1157 बॉक्स चेरी मुंबई, वडोदरा तथा सुरत भेजी जा चुकी है। यह पार्सल-एस.एल.आर. सर्विस ट्रेन संख्या 12926 (पश्चिम सुपरफास्ट एक्सप्रेस) और ट्रेन संख्या 12904 (गोल्डन टेम्पल मेल) के माध्यम से उपलब्ध कराई जा रही है। चेरी जैसे पेरिशेबल फल के लिए समय पर परिवहन सबसे बड़ी चुनौती होती है। इसे ध्यान में रखते हुए फिरोजपुर मंडल ने लॉजिस्टिक व्यवस्था सुनिश्चित की है। यह पार्सल-एस.एल.आर. सर्विस लगभग 29 घंटे में वडोदरा, सूरत तथा 31 घंटे में अमृतसर से बांद्रा पहुँचती है, जिससे चेरी की ताजगी और गुणवत्ता बनी रहती है तथा मुंबई के बाजारों तक सीधे ताजा फल पहुंच जाता है।
मंडल रेल प्रबंधक फिरोजपुर श्री संजीव कुमार ने बताया कि फिरोजपुर मंडल चेरी उत्पादकों को बेहतर पार्सल-एस.एल.आर. सर्विस उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि चेरी परिवहन के लिए पर्याप्त पार्सल-एस.एल.आर. और अन्य संसाधनों की व्यवस्था फिरोजपुर मंडल की ओर से की गई है और व्यापारियों की मांग के अनुसार निर्बाध सेवा उपलब्ध कराई जा रही है। इस सीजन रोजाना नियमित ट्रेनों में उपलब्ध एस.एल.आर. कोच के माध्यम से चेरी के इस सीजन में ढुलाई जारी रहेगी। इससे चेरी उत्पादक, अपनी उपज, कम लागत में, देश के बांद्रा, वडोदरा तथा सुरत के बाजारों तक पहुंचा रहे हैं।
फिरोजपुर मंडल की यह तेज, सुरक्षित और समयबद्ध पार्सल सेवा न केवल परिवहन को आसान बना रही है, बल्कि जम्मू-कश्मीर के चेरी उत्पादकों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य दिलाने में भी सहायक सिद्ध हो रही है।

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