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*भक्ति के रास्ते पर आगे बढ़ने के लिए संकल्प पहला कदम है: साध्वी वत्सला भारती जी*

*भक्ति के रास्ते पर आगे बढ़ने के लिए संकल्प पहला कदम है: साध्वी वत्सला भारती जी*
फिरोजपुर, 1-10-2026: दिव्य ज्योति जागृति संस्थान के फिरोजपुर स्थित स्थानीय आश्रम में साप्ताहिक सत्संग प्रोग्राम का आयोजन किया गया। इस मौके पर श्री आशुतोष महाराज जी की परम शिष्या साध्वी वत्सला भारती जी ने संगत को संबोधित करते हुए कहा, ‘भक्ति के रास्ते पर चलने, ईश्वर को पाने और जीवन में आगे बढ़ने के लिए संकल्प पहला कदम है।’
साध्वी वत्सला भारती जी ने कहा कि इंसान के जीवन में संकल्प का बहुत महत्व है। किसी भी लक्ष्य को पाने के लिए पक्का इरादा, लगातार कोशिशें और सही मार्ग दर्शन की ज़रूरत होती है। इसी तरह आध्यात्मिक रास्ते पर आगे बढ़ने और ईश्वर को पाने के लिए भी इंसान के अंदर पक्का इरादा होना ज़रूरी है। सिर्फ इच्छा करने से लक्ष्य हासिल नहीं होता, बल्कि उस इच्छा को पूरा करने के लिए लगातार कोशिशें करनी पड़ती हैं।
उन्होंने बताया कि भक्ति का रास्ता इंसान को आत्मिक शांति, आत्म नियंत्रण और सही जीवन जीने की प्रेरणा देता है। लेकिन इस रास्ते पर चलने के लिए मन की एकाग्रता, पक्का विश्वास और पूरे गुरु का मार्गदर्शन बहुत ज़रूरी है। जब इंसान अपनी ज़िंदगी का लक्ष्य तय कर लेता है और उसे पाने का पक्का इरादा कर लेता है, तो मुश्किलों के बावजूद वह अपने रास्ते से नहीं भटकता। साध्वी जी ने कहा कि भगवान को पाना सिर्फ़ बाहरी रस्मों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह अंदर की समझ की बात है। पूरे सतगुरु की शरण में ब्रह्म ज्ञान पाकर इंसान अपने अंदर भगवान के प्रकाशमान रूप का अनुभव कर सकता है। इसलिए इंसान को सतगुरु की शिक्षाओं को अपने जीवन में अपनाकर भक्ति, सेवा और सत्संग से जुड़े रहने का संकल्प लेना चाहिए। उन्होंने संगत को जीवन में सफलता और आध्यात्मिक तरक्की के लिए अपने संकल्पों को मज़बूत करने के लिए प्रेरित किया। आइए हम बुरे विचारों और आलस्य को छोड़कर अच्छे कर्मों, सेवा भावना और भगवान की भक्ति के रास्ते पर आगे बढ़ें। जब इंसान का मकसद साफ़ होता है और उसका इरादा पक्का होता है, तो उसकी ज़िंदगी में अच्छे बदलाव होने लगते हैं। इस मौके पर साध्वी पूनम भारती जी और साध्वी नवरीति भारती जी ने मधुर भजन और कीर्तन गाए। भक्ति भजनों ने पूरी संगत को आध्यात्मिक रस से जोड़ दिया और आश्रम का माहौल भगवान की भक्ति से भर गया। आखिर में सत्संग के ज़रिए संगत को प्रेरणा दी गई कि इंसान को अपने जीवन में भगवान को पाने, सच्चाई के रास्ते पर चलने और समाज की भलाई के लिए अच्छे संकल्प लेने चाहिए और उन्हें पूरा करने के लिए लगातार कोशिश करनी चाहिए।




