
देव समाज कॉलेज फॉर वूमेन, फिरोजपुर में ‘व्हाई थ्योरी? एन इंट्रोडक्शन टू लिटरेचर एंड लिटरेरी थ्योरी’ विषय पर सेमिनार

देव समाज कॉलेज फॉर वूमेन, फिरोजपुर में ‘व्हाई थ्योरी? एन इंट्रोडक्शन टू लिटरेचर एंड लिटरेरी थ्योरी’ विषय पर सेमिनार
फिरोजपुर, 24,9,2026: देव समाज कॉलेज फॉर वूमेन, फिरोजपुर, जो पंजाब विश्वविद्यालय से ‘ए प्लस ग्रेड’ प्राप्त संस्थान है, निरंतर शैक्षणिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों में अग्रणी रहा है। कॉलेज का उद्देश्य छात्राओं को उच्च शिक्षा के साथ-साथ नैतिक मूल्यों एवं सामाजिक जिम्मेदारियों की शिक्षा प्रदान करना है। कॉलेज के चेयरमैन श्रीमान निर्मल सिंह ढिल्लों जी के आशीर्वाद, डॉ. अगनीज़ ढिल्लों, प्रधान (कॉलेज मैनेजमेंट) एवं सचिव, देव समाज के योग्य मार्गदर्शन, श्री अजय बत्ता (कॉलेज सचिव) तथा डॉ. संगीता (प्रिंसिपल) के नेतृत्व में यह संस्थान निरंतर नई ऊंचाइयों की ओर अग्रसर है।
देव समाज कॉलेज फॉर वूमेन, फिरोजपुर के स्नातकोत्तर अंग्रेजी विभाग द्वारा विद्यार्थियों में साहित्यिक समझ एवं आलोचनात्मक चिंतन विकसित करने के उद्देश्य से ‘व्हाई थ्योरी? एन इंट्रोडक्शन टू लिटरेचर एंड लिटरेरी थ्योरी’ विषय पर दिनांक 24-09-2026 को एक विशेष सेमिनार आयोजित किया गया। इस अवसर पर पंजाब विश्वविद्यालय रीजनल सेंटर, मुक्तसर साहिब के प्रोफेसर जे. एस. ढिल्लों ने मुख्य वक्ता के रूप में शिरकत की।

इस अवसर पर कॉलेज की प्रिंसिपल डॉ. संगीता तथा डॉ. भूमिदा शर्मा, प्रमुख, सनातकोत्त्रविभाग अंग्रेजी एवं फैकल्टी सदस्यों द्वारा प्लांटर भेंट कर प्रो. जे. एस. ढिल्लों का कॉलेज परिसर में पहुंचने पर गर्मजोशी से स्वागत किया गया।
कॉलेज प्रिंसिपल डॉ. संगीता ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि यह सेमिनार विद्यार्थियों को साहित्यिक सिद्धांत, आलोचनात्मक चिंतन तथा साहित्यिक रचनाओं के गहन अर्थों को समझने के लिए एक नया दृष्टिकोण प्रदान करता है।
इस अवसर पर अपने विस्तृत एवं विचारोत्तेजक संबोधन में मुख्य वक्ता प्रो. जे. एस. ढिल्लों ने साहित्य एवं साहित्यिक सिद्धांत की प्रकृति, महत्त्व तथा इनके आपसी संबंधों के बारे में विद्यार्थियों के साथ विचार साझा किए। उन्होंने समझाया कि साहित्यिक सिद्धांत हमें किसी रचना को केवल उसके प्रत्यक्ष अर्थ तक सीमित न रखते हुए उसमें मौजूद विभिन्न परतों, विचारों एवं अर्थों को समझने के लिए नए दृष्टिकोण प्रदान करता है।
इस अवसर पर विद्यार्थियों ने मुख्य वक्ता के साथ प्रश्नोत्तर के माध्यम से संवाद स्थापित किया। साहित्य के विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक प्रश्न पूछे तथा विचार-विमर्श में सक्रिय भाग लिया। प्रो. प्रो. जे. एस. ढिल्लों ने विद्यार्थियों को पारंपरिक धारणाओं से आगे बढ़कर सोचने, प्रश्न करने तथा साहित्यिक पाठों की विभिन्न दृष्टिकोणों से व्याख्या करने के लिए प्रेरित किया।
इस सेमिनार ने विद्यार्थियों को यह समझने का अवसर प्रदान किया कि साहित्यिक सिद्धांत केवल एक अकादमिक विषय नहीं, बल्कि साहित्य को नए ढंग से पढ़ने, समझने एवं उसकी व्याख्या करने का एक महत्वपूर्ण साधन है। इस सत्र ने विद्यार्थियों के आलोचनात्मक चिंतन को प्रोत्साहित करते हुए उन्हें साहित्य के अध्ययन के लिए नए बौद्धिक मार्ग प्रदान किए।




