
Ferozepur News
*युवा पीढ़ी को नशे की बुराइयों से बचाने के लिए ‘बोध’ प्रकल्प के तहत खास कार्यक्रम का आयोजन*
*युवाओं को सिर्फ नशे के नुकसान बताना काफी नहीं है, बल्कि उन्हें ज़िंदगी में एक सकारात्मक मकसद और सही दिशा देना भी ज़रूरी है। : साध्वी देविंदर भारती*

*युवा पीढ़ी को नशे की बुराइयों से बचाने के लिए ‘बोध’ प्रकल्प के तहत खास कार्यक्रम का आयोजन*
*युवाओं को सिर्फ नशे के नुकसान बताना काफी नहीं है, बल्कि उन्हें ज़िंदगी में एक सकारात्मक मकसद और सही दिशा देना भी ज़रूरी है। : साध्वी देविंदर भारती*
फिरोजपुर: दिव्य ज्योति जागृति संस्थान की तरफ से समाज को नशे जैसी गंभीर सामाजिक बुराई से आज़ाद करने के मकसद से चलाए जा रहे ‘बोध’ नशा मुक्ति प्रकल्प के तहत फिरोजपुर के लक्खा सिंह हिठार गांव में एक खास जागरूकता प्रोग्राम किया गया। इस दौरान युवाओं को नशे से दूर रहने, अपनी ज़िंदगी को सही दिशा देने और समाज की तरक्की में अपनी कंस्ट्रक्टिव भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया गया। *इस मौके पर संस्थान के संस्थापक एवं संचालक श्री आशुतोष महाराज जी की परम शिष्या साध्वी देविंदर भारती जी ने इलाके के लोगों को संबोधित करते हुए कहा* कि आज नशा सिर्फ एक इंसान की ज़िंदगी पर असर डालने वाली समस्या नहीं रह गई है, बल्कि यह पूरे परिवार और समाज के लिए एक बड़ी चुनौती बन गई है। हम सब जानते हैं कि नशे ने कई परिवारों की खुशियां छीन ली हैं और कई युवाओं के सुनहरे भविष्य को अंधेरे की ओर धकेल दिया है।
उन्होंने कहा कि जब कोई युवा ड्रग्स की गिरफ्त में आता है, तो इसका असर सिर्फ़ उसकी अपनी ज़िंदगी तक ही सीमित नहीं रहता। उसका परिवार मानसिक, आर्थिक और सामाजिक रूप से प्रभावित होता है। ड्रग्स की लत इंसान की सोचने-समझने की क्षमता और ज़िंदगी को देखने के नज़रिए पर भी असर डाल सकती है। इसलिए युवाओं को नशे से बचाना सिर्फ़ सरकार या किसी एक संस्था की ज़िम्मेदारी नहीं है, बल्कि परिवार,अध्यापक, समाज और हर ज़िम्मेदार नागरिक को मिलकर इस दिशा में काम करना चाहिए।
साध्वी देवेंद्र भारती जी ने कहा कि इस के कई कारण हो सकते हैं। बेरोज़गारी, अज्ञानता, बुरी संगत, पारिवारिक और सामाजिक समस्याओं के साथ-साथ मीडिया और सोशल मीडिया पर दिखाया जाने वाला कुछ गलत या नकारात्मक कंटेंट भी युवाओं की सोच पर असर डाल सकता है। इसलिए युवाओं को सिर्फ़ ड्रग्स के नुकसान बताना काफ़ी नहीं है, बल्कि उन्हें ज़िंदगी में एक सकारात्मक मकसद और सही दिशा देना भी ज़रूरी है।
उन्होंने आगे कहा कि युवा पीढ़ी किसी भी देश की ताकत और भविष्य होती है। अगर युवा अपनी ऊर्जा सही दिशा में लगाएं, तो वे अपने परिवार, समाज और देश की तरक्की में अहम योगदान दे सकते हैं। इसलिए, युवाओं को खेल, शिक्षा, रोज़गार देने वाले हुनर, समाज सेवा और रचनात्मक कामों से जोड़ने के साथ-साथ गुरु साहिबान के दिखाए जीवन के ऊंचे और सच्चे रास्ते से जोड़ना ज़रूरी है।
*साध्वी जी ने कहा कि संस्थान के संस्थापक एवं संचालक श्री आशुतोष महाराज जी अक्सर इस बात पर ज़ोर देते हैं कि अगर किसी बीमारी को जड़ से खत्म करना है, तो उसकी जड़ पर काम करना होगा। इसी तरह, नशे की लत की समस्या से निपटने के लिए न सिर्फ़ नशे की आदत को छोड़ने की कोशिश करना ज़रूरी है, बल्कि इसके पीछे के मानसिक और अंदरूनी कारणों को भी समझना होगा।*
उन्होंने कहा कि नशे के आदी व्यक्ति की सोच और ज़िंदगी के नज़रिए में सकारात्मक बदलाव लाना ज़रूरी है। संस्थान द्वारा चलाए जा रहे ‘बोध’ नशा मुक्ति प्रोग्राम का मकसद लोगों को जागरूक करना और युवाओं को नशे से दूर रहकर एक सेहतमंद और अनुशासित ज़िंदगी जीने के लिए प्रेरित करना है। *उनके अनुसार, आध्यात्मिक जागरूकता और ब्रह्म ज्ञान का दर्शन किसी व्यक्ति को उसके जीवन का असली मकसद समझने के लिए प्रेरित कर सकता है।* कार्यक्रम के दौरान, वहां मौजूद निवासियों और युवाओं ने नशे के खिलाफ जागरूकता फैलाने और समाज को नशा मुक्त बनाने के लिए मिलकर कोशिश करने का संकल्प लिया। संस्थान के सेवकों ने भी लोगों को ‘बोध’ प्रोग्राम में शामिल होने और ड्रग्स से प्रभावित लोगों को सही दिशा देने के लिए प्रेरित किया।




