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एक आदर्श अध्यापक कैसा हो:-

स डी हाई स्कूल में
ओल्ड स्टूडेंट्स एसोसिएशन द्वारा मनाए जा रहे ‘अध्यापक दिवस’ पर विशेष
एक आदर्श अध्यापक कैसा हो:-

RAJ KISHORE KALRA PHOTO
एक समय था जब शिक्षा प्राप्त करने का साधन केवल सरकारी स्कूल ही थे। निर्धन व माध्यम वर्ग के लोगों के बच्चे सरकारी स्कूलों में ही पढ़ते थे। सरकारी स्कूलों में अध्यापक छात्रों को मेहनत व लगन से पढ़ाना अपना कर्तव्य समझते थे। इस लिए ही सरकारी स्कूलों में पढ़ाने वाले अध्यापकों की आलोचना नहीं बल्कि प्रशंसा की जाती थी। समय बीतने पर सरकारी स्कूलों में बहुत संख्या उन अध्यापकों की हो गई जो अपने कर्तव्यों को नजर अंदाज करने लगे। दूसरी ओर प्राइवेट व माडल स्कूल खुलने आरंभ हो गए। प्राइवेट स्कूल तो पहले भी थे परन्तु संख्या में बहुत कम। उनमें केवल धनी लोगों के बच्चे ही पढ़ते थे। अब तो प्राइवेट व माडल स्कूलों की संख्या बहुत अधिक हो गई है। अब प्राइवेट व सरकारी स्कूलों की कार्यप्रणाली की तुलना होने लगी है। एक तरफ सरकारी स्कूलों के वे अध्यापक जो छात्रों को मेहनत से पढ़ाते हैं। वे अपने व्यवसाय के प्रति समॢपत हैं जिन्हें आदर्श अध्यापक कहा जा सकता है। दूसरी तरफ समाज के वे लोग हैं जो सरकारी स्कूलों के अध्यापकों को आदर्श अध्यापक मानने को तैयार ही नहीं हैं। सरकारी स्कूलों के अध्यापक लोगों की आलोचना को बुरा मानते हैं। उन्हें आलोचना को बुरा बनाने की जरूरत नहीं है। उन्हें समाज के लोगों से अपने आदर्श होने का प्रमाण पत्र लेने की जरूरत नहीं, अपितु अपने इन गुणों के आधार पर निर्णय ले सकते हैं कि वह आदर्श अध्यापक हैं या नहीं। आदर्श अध्यापक न कभी स्कूल देर से जाता है ओर न ही स्कूल से पहले वापिस आता है। वह पीरियड में बैठने नहीं अपितु पढ़ाने जाता है। वह पीरियड के लगने के समय ही कक्षा में पहुंच जाता है। वह स्कूल प्रमुख की कभी आलोचना नहीं करता बल्कि उसे प्रत्येक समय सहयोग देने के लिए तैयार रहता है। वह स्कूल समय में अपने घर के कार्य करने के लिए स्कूल से नहीं भागता। वह अपने अधिकारों व कर्तव्यों के प्रति अधिक सुचेत होता है। वह अतिरिक्त बातों में विश्वास नहीं करता बल्कि वह अपने कार्य करने में विश्वास करता है। वह ऐसा कोई भी कार्य नहीं करता जिससे उसके अध्यापक साथियों, स्कूल प्रमुख व समाज के लोगों को उसकी आलोचना करने का अवसर मिले। आदर्श अध्यापक का बातचीत करने का ढंग, पढ़ाने का ढंग ओर व्यवहार विद्याॢथयों के लिए आदर्श होता है। आदर्श अध्यापक ज्ञान बांटते हैं बेचते नहीं। वह सारा जीवन अध्यापक होने के साथ साथ शिक्षार्थी भी बने रहते हैं। वह कभी भी संस्था के अनुशासन को भंग नहीं करते। वह कभी भी ऐसा कोई कार्य नहीं करते जिससे अध्यापक पद की गरिमा कम हो। वह अपने विषय में पूर्ण होने के लिए सदैव प्रयत्नशील रहते हैं। वह अपने विचारों द्वारा छात्रों के ह्रदय में प्रेम, सहयोग, ईमानदारी, मित्रता, देश भक्ति, समाज सेवा, सच्चाई व परोपकार की भावना उत्पन्न कर उन्हें आदर्श नागरिक बनाने का प्रयत्न करते हैं। वह अपने विद्याॢथयों को नकल की बुराई से दूर रखते हैं ओर सदैव नकल के विरोधी होते हैं।
जिन अध्यापकों में यह गुण होते हैं वे आदर्श अध्यापक ही होते हैं। ऐसे अध्यापकों का ही समाज में सम्मान व सत्कार होता है। यदि समाज के कुछ लोग सरकारी अध्यापकों की आलोचना करते भी हैं तो अध्यापकों को उनका बुरा मानने की उपेक्षा उन पर विचार करना चाहिए। यदि उनकी आलोचना का कोई आधार ही नहीं है तो उसे नजर अंदाज कर देना चाहिए।
राज किशोर कालड़ा
पैटर्न एस.डी. हाई स्कूल फाजिल्का
ओल्ड स्टूडेंटस एसोसिएशन।
मो. 94633-01304

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