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बेरोजगारी को दूर करने के लिए रोजगार परक शिक्षा की व्यवस्था करना समय की मांग: शिक्षा शास्त्री कालड़ा

बेरोजगारी को दूर करने के लिए रोजगार परक शिक्षा की व्यवस्था करना समय की मांग: शिक्षा शास्त्री कालड़ा

RAJ KISHORE KALRA PHOTO

फाजिल्का, 27 सितम्बर: (Harish Monga ) : राष्ट्र के बहुपक्षीय विकास हेतु रोजगारपरक शुल्भ व गुणवत्ता पर आधारित शिक्षा उपलबध करवाना समय की मांग तथा सरकार का प्राथमिक दायित्व है।

इन विचारों का प्रगटावा शिक्षा शास्त्री राज किशोर कालड़ा ने एक प्रैस को जारी व्यक्तव्य में किया। उन्होंने बताया कि गत 25 वर्षो में शिक्षा के क्षेत्र में अनेकों परिवर्तन हुए हैं। प्राथमिक स्तर से लेकर उच्च विद्यालयों तक देश में शैक्षणिक संस्थान बढकर लगभग 12 लाख हो गए हैं। उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाले युवाओं की संख्या लगभग 1 करोड़ 25 लाख प्रति वर्ष है। 400 से अधिक विश्वविद्यालयों की लंबी श्रृंखला है और भारत के 95 प्रतिशत क्षेत्र में एक किलोमीटर तक विद्यालय स्थापित हैं। 6 से 14 वर्ष के छात्रों हेतु शिक्षा के अधिकार का कानून गत 5 वर्षो से लागू हो चुका है।

शिक्षा शास्त्री ने कहा कि उक्त बातें होते हुए भी देश भर में निरक्षरता को समाप्त करने के लिए सर्व शिक्षा अभियान, रमसा व उच्च शिक्षा अभियान पूरे उत्साह के साथ चलाया जा रहा है। आज शिक्षा में प्रौद्यिगिकी, तकनीकी शिक्षा, रक्षा विज्ञान, वाणिज्य व कृषि लगभग सभी क्षेत्रों में नए आयाम स्थापित किए जा रहे हैं। लेकिन यह भी कटू सत्य है कि शिक्षा का उतना विकास नहीं हो पाया जितनी आवश्यकता थी।

श्री कालड़ा ने केन्द्रीय सरकार व प्रांतीय सरकारों से मांग की है कि शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण व संवेदनशील विषय के सर्वपक्षीय विकास के लिए वर्तमान केन्द्र सरकार द्वारा सकल घरेलू उत्पाद(जीडीपी) का 6 प्रतिशत शिक्षा का व्यय करना, शिक्षा क्षेत्र हेतु अधिक धन जुटाने के लिए केन्द्रीय करों पर उपकर लगाने, कुल शिक्षा के बजट का 50 प्रतिशत एलीमेट्री शिक्षा पर व्यय करने, उच्च शिक्षा के लिए ऋण उपलब्ध करवाने व जरूरतमंद वर्ग को विशेष सुविधाएं प्रदान करने, सरकारी निवेश बढाने सहित सर्व शिक्षा अभियान की सफलता और बेरोजगारी दूर करने के लिए रोजगार परख शिक्षा की व्यवस्था करना आज समय की मांग है।

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