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बुनियादी शिक्षा-भविष्य की सुरक्षा : शिक्षाविद्, राज किशोर कालड़ा

बुनियादी शिक्षा-भविष्य की सुरक्षा

RAJ KISHORE KALRA PHOTO

Ferozeur, August 17, 2015 : विशेषज्ञ मानते हैं कि मात्र 5 वर्ष की आयु तक बच्चे के लगभग 75 प्रतिशत मास्तिष्क का निर्माण हो जाता है । ऐसे में यह सहज ही अनुमान लगाया जा सकता है कि बचपन जीवन में कितना महत्वपूर्ण होता है।
बच्चा सबसे पहले घर के सदस्यों के बीच रहकर वहीं से प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त करता है। भाषा, संस्कार व कुछ मुलभूत जानकारियां उसे घर से ही मिलती हैं। तभी तो अमेरिका में बच्चों को अंग्रेजी नहीं सिखानी पड़ती और भारतीय बच्चों को हिंदी खुद-ब-खुद आ जाती है।
फिर धीरे-धीरे बच्चा बाहरी दुनियां के संपंर्क में आता है। इसके अलावा स्कूल की भी बच्चों के जीवन में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका होती है। यह जरूरी है कि बच्चे के पूर्ण विकास के लिए उनकी नींव ठोस हो।
हर बच्चे में कोई न कोई गुण अवश्य होता है। अगर उसे सही समय में पहचान लिया जाए तो बच्चा जीवन में बहुत आगे जाता है। उदाहरण के लिए प्रसिद्ध चैस खिलाड़ी तान्या सचदेव मात्र 7 साल की आयु में चैस के बारे में पिता से प्रश्न करने लगी और तभी उनके पिता ने पहचान लिया कि तान्या में यह प्रतिभा छिपी है। फिर उसकी प्रतिभा को उभारने के प्रयत्न किए गए और आज वह किसी पहचान की मोहताज नहीं। बच्चे की हर क्रिया को ध्यान से देखें। उसे क्या करना अच्छा लगता है, क्या नहीं, पहचानें। इसका उसके भविष्य पर निश्चय ही प्रभाव पड़ेगा।
लगभग सभी पेरेंटस को यह शिकायत होती है कि बच्चे इतने प्रश्न पूछते हैं कि उनके हर सवाल का जवाब देना मुश्किल हो जाता है। इसलिए वो बात को खत्म करने के लिए कुछ भी कह देते हैं पर ऐसा न करें। बच्चे की जिज्ञासा को पाजीटिव सेंस में लें और उनके प्रश्नों के उत्तर तर्क के आधार पर सूझबूझ से दें।
‘पड़ोगे लिखोगे बनोगो नवाब, खेलोगे कूदोगे हो जाओगे खराब…’ यह कहावत अब बिलकुल महत्वहीन है। बच्चों को पढाई के साथ-साथ खेलने के लिए भी प्रेरित करें। इससे उसका ध्यान टीवी की ओर न जाकर प्राकृति से जुड़ेगा जो सेहत के लिए हितकर होता है। वहीं स्पोटर्स में यदि बच्चे का हुनर है तो वह भी निकलकर सामने आ जाएगा।
बच्चे कहानी बड़े चाव से सुनते हैं इसलिए रात को सोने से पहले या जब भी समय हो, बच्चे को कहानियों के जरिए नई-नई जानकारियां दें। इससे उसका मनोरंजन होगा, पेरेंटस से लगाव बढेगा। नई जानकारियां मिलेंगी व उसकी कल्पना-शक्ति बढेगी जो मास्तिष्क के लिए काफी लाभकारी होती है। कहानियों के साथ-साथ बच्चे के खेल-खेल में नई-नई चीजें सिखाएं, उसके साथ ऐसे गेम्स खेलें जिससे उनकी बुद्धि तेज हो जैसे उसे कविता या शब्दों की स्पैलिंग सुनाने को कहे।
बचपन किसी पौधे के बीज, जैसा हो। जो चीज ढंग से बोया जाएगा, उसी का अच्छा पौधा उगेगा। आज की भागती-दौड़ती जिंदगी से बच्चे की अच्छी देखभाल मुख्य समस्या है। लेकिन बच्चे को कवालिटी टाइम और कवालिटी एजुकेशन देना माता-पिता का कर्तव्य है तभी उसका भविष्य उज्जवल हो सकेगा।
शिक्षाविद्, राज किशोर कालड़ा
94633-01304
बस्ती हजूर सिंह, फाजिल्का

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