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आसन शृंखला: प्रारंभिक – ३  योगी अश्विनी : निहित प्रारंभिक आसनों की चर्चा

आसनों की इस श्रृंखला में हम सनातन क्रिया में निहित प्रारंभिक आसनों की चर्चा करते रहे हैं| इन आसनों का नियमित रूप से अभ्यास करनेवाले को तेजस्वी, स्वस्थ शरीर एवं आकर्षक व्यक्तित्व प्राप्त होता है| चूँकि ये आसन प्राणमाया कोश के स्तर पर कार्य करते हैं, जो कि सनातन क्रिया के नियमित अभ्यास द्वारा उच्चतम श्रेणी प्राप्त होने पर साधक को विभिन्न रंगों के रुप में दिखता है, ये आसन रोग को शरीर में व्यक्त होने ही नहीं देते| अब तक हमने टखने और घुटने के जोड़ों में प्राण के संतुलित प्रवाह हेतु कुछ आसनों पर चर्चा की| अब हम जांघ के जोड़ों के आसनों पर चर्चा करेंगे|
Yogi Ashwani
अपने पैर सीधे फैलाकर बैठें| अपनी पीठ सीधी रखें और आपने दोनों पैरों और एड़ियों को जोड़ें| अपनी हथेलियों को ज़मीन पर कूल्हों के समीप इस तरह रखें, जिसमें आपके हाथों की अंगुलियाँ आपके शरीर से विपरीत दिशा में हों  |
अब अपने दाहिने पैर को सीधे रखते हुए, बाएं पैर को मोड़कर उसके टखने को दाहिने पैर की जांघ पर रखें| अपने दाहिने हाथ से अपने बाएं टखने को सहारा दें और अपना बायां हाथ अपने बाएं घुटने पर रखें| फिर श्वास को अंदर लेते हुए अपने बाएं घुटने को अपने बाएं हाथ से अपनी छाती के नज़दीक लाएं और श्वास को बाहर छोड़ते हुए, धीरे से अपने बाएं घुटने को नीचे जमीन की ओर धकेलें | यही प्रक्रिया अपनी दूसरी जांघ पर भी सात बार दोहोराएं | इस पूरी प्रक्रिया के दौरान अपनी पीठ सीधी रखें|
इसके बाद अपने दोनों पैरों के पंजों और एड़ियों को एक दूसरे से जोड़कर उन दोनों पैरों के टखनों को अपने दोनों हाथों से पकड़ें| अपनी एड़ियों को पेरिनियम के जितने निकट आप रख सकतें हैं उतने निकट रखें| फिर श्वास को अंदर लेते हुए अपने दोनों घुटनों को ऊपर की ओर अपने कंधों के निकट लाते हुए उठाएं अब श्वास को बाहर छोड़ते हुए अपने दोनों घुटनों को नीचे की ओर ले जाते हुए ज़मीन को छूने का प्रयास करें| यह प्रक्रिया सात बार दोहोराएं।
अब अपने दाहिने पैर को सीधे रखते हुए, बायां पैर मोड़कर उसके टखने को दाहिने पैर की जांघ पर रखें| अपने दाहिने हाथ से अपने बाएं टखने को सहारा दें और अपने बाएं पैर के घुटने को अपने बाएं हाथ से पकड़ें| अपनी बाईं जांघ का चक्रानुक्रम सात बार घड़ी की सुई की दिशा में और फिर सात बार उसकी विपरीत दिशा में करें| हर आधे चक्रानुक्रम के दौरान श्वास अंदर लें व दूसरे आधे चक्रानुक्रम के दौरान श्वास को बाहर छोड़ें| यही प्रक्रिया अपने दूसरे पैर पर भी करें|
ये आसान से प्रतीत होनेवाले चक्रानुक्रम आपके शरीर के विभिन्न जोड़ों में होने वाले ऊर्जा के अवरोधों को दूर करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं | अधिक लाभ के लिए इन आसनों को करते समय अपनी आँखें बंद रखें तथा अपना पूर्ण ध्यान शरीर के भीतर उस भाग पर रखें, जिसका चक्रानुक्रम किया जा रहा है|
योगी अश्विनी जी  ध्यान फाउंडेशन के मार्गदर्शक  है|   www.dhyanfoundation.com. पर उनसे  संपर्क किया  जा  सकता  है

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