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… आखिर कितने मयंक निगलेंगे सडक़ हादसे, जिला प्रशासन की ढीली कार्यप्रणाली से शहर में प्रवेश हो रहे बड़े वाहनन -जनता को फिर आई मासूस मयंक की याद, प्रशासनिक दावे मात्र अखबारी खबरो तक सीमित-

तरूण जैन, फिरोजपुर
    आखिर कितने मयंक सडक़ हादसो की भेंट चढ़ते रहेंगे और कब जिला प्रशासन, राजनेताओं की कुम्भकर्णी नींद टूटेगी। छोटी-छोटी उपलब्धियों पर बड़ी-बड़ी खबरे लगवाने वाले जिला प्रशासन के अधिकारी फिरोजपुर की जनता की सुरक्षा को सुचेत नहीं है और हाल इस कद्र बदत्तर बने हुए है कि बिगड़ चुकी ट्रैफिक व्यवस्था को सुधारने में अधिकारी ध्यान देने की बजाय ट्रैफिक पुलिस मात्र बड़े ट्रको को किनारे पर रोककर कानाफूसी करने तथा चलान कटने तक सीमित है। जिसके चलते आएं दिन सडक़ हादसों में अनेको मासूम लोगों की जान जा रही है।
    7 अक्तूबर 2017 को भी शहीद भगत ङ्क्षसह स्टेडियम के पास हुए हादसे में कशमीरी लाल शर्मा के मासूम पौत्रे मयंक शर्मा की मौत हो गई थी। उस वक्त शहरियों और प्रशासन द्वारा बड़े वाहनों के शहर में प्रवेश पर रोक लगाई हो, लेकि अब फिर से वाहनो के आने के कारण शनिवार रात्रि दो मासूस बेटियों की ट्रक के नीचे कुचलने से मौत हो गई। जैसे ही दोनो बच्चों के मौत की खबर सोशल मीडिया के माध्यम से फैली तो मयंक शर्मा की मौत के जख्म हरे हो गए। मयंक शर्मा के पिता दीपक शर्मा ने कहा कि पुलिस, जिला प्रशासन और शहरियों को एक बड़ा आंदोलन छेडऩे की जरूरत है ताकि अनेको मासूम जाने बच जाएं।
    बेशक मयंक के पिता द्वारा अपने बेटे की याद में ट्रैफिक जागरूकता के अलावा अनेको प्रोजैक्ट चलाएं जा रहे हो, लेकिन वर्तमान में जरूरत यातायात के प्रति जागरूकता की है। बढ़ रहे ट्रैफिक के कारण आएं दिन हादसे बढ़ रहे है और पुलिस मात्र भारतीय दंड संहिता की धारा 304 ऐ के तहत मामला दर्ज कर चालक को जमानत दे देती है। ठोस नीति ना होंने के कारण ऐसे हादसे बढ़ते जा रहे है।
    अब देखना यह होगा कि क्या वाकई अब ट्रैफिक व्यवस्था सुधरने पर ठोस रणनीति तैयार होगी, या फिर पहले ही तरह सोशल मीडिया में रिप-रिप लिखकर इस घटना को भूला दिया जाएगा।
    

 

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